Samar Shesh Hai

Samar Shesh Hai   

Author: Viveki Rai
ISBN: 9788173159121
Language: Hindi
Edition: 1st
Publication Year: 2011
Pages: 516
Binding Style: Hard Cover
Rs. 500
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Description

मुश्किल यह है कि गाँव में पुराने खयाल का जो आम चेहरा है, उसका स्वभाव है कि भीतर गरीबी की आग जल रही हो तब भी ऊपर से हँसता रहेगा। किंतु नए जमान का नया चेहरा है कि सुख-सुविधा और नए धन की खुशहाली भीतर छिपाकर बाहर से रोता फिरेगा—‘सरकार यह नहीं करती, वह नहीं करती। हम तो मर गए, उजड़ गए।’

एक ओर हिंदुस्तान में गगनानंद और उनके महागुरु शून्यानंद जैसे धर्म गुरुओं और स्वयंभू भगवानों के पीछे विराट् पूँजी लगी है। नाना प्रकार की चकाचौंध और उच्चाटन के सहारे ये लोग बुद्धिजीवियों को भरमाने में लगे हैं। दूसरी ओर विज्ञान के द्वारा ईश्वर को धकियाकर व आधुनिक जीवन के मुहावरों को विचारों में ढालकर वैज्ञानिक पद्धति से नपुंसक बनाने का कारोबार चलने लगा है।

सुराज उन बाधाओं को हटाना चाहता है, जो उसे अपनी जनता से नहीं मिलने देतीं। वह हुमाच भर-भरकर अपनी अनन्दायिनी ग्राम्य देवी के पास जाना चाहता है; लेकिन क्या स्टेशन से आगे कहीं बढ़ पाता है? यह निराश होकर लौट आता है। कुछ दिन बाद फिर आशा जगती है शायद अब सड़क बन गई हो। मगर अफसोस! सपना सपना रह जाता है। बिना सड़क के जनता तक जाने का सवाल ही नहीं।...क्या जनता ही अब हिम्मत कर सुराज तक पहुँचेगी?

बकबक बोलूँगा तो क्रांति कैसे होगी?...भाषण, अखबार, रेडियो, दूरदर्शन, प्रचार, पार्टी, प्रस्ताव, तंत्र और नाना प्रकार की आधुनिक समझदारियों ने देश को नरक बना दिया है। नरक अवांछित है, मगर हम ढो रहे हैं। यह असह्य है, पर हम सह रहे हैं।...गुरुदेव! आप क्या सोच रहे हैं?
—इसी उपन्यास से

The Author
Viveki Rai

जन्म : 19 नवंबर, 1924, गाँव-भरौली, जिला-बलिया (उ.प्र.)।

काव्य : अर्गला, रजनी गंधा, यह जो है गायत्री ।
कहानी संग्रह : जीवन परिधि, गूँगा जहाज, नई कोयल, कालातीत, बेटे की बिक्री, चित्रकूट के घाट पर, विवेकी राय की श्रेष्‍ठ कहानियाँ ।
उपन्यास : बबूल, पुरुष पुराण, लोकऋण, श्‍वेतपत्र, सोनामाटी, समर शेष है, मंगल भवन, नमामि ग्रामम् अमंगलहारी ।
ललित निबंध : फिर बैतलवा डाल पर, जलूस रुका है, गँवई गंध गुलाब, मनबोध मास्टर की डायरी, नया गाँवनामा, मेरी श्रेष्‍ठ व्यंग्य रचनाएँ, आम रास्ता नहीं है, जगत् तपोवन सो कियो ।
निबंध और शोध समीक्षा : त्रिधारा, गाँवों की दुनिया, किसानों का देश, अध्ययन आलोक, स्वातंत्र्योत्तर कथा -साहित्य और ग्राम-जीवन, हिंदी।

उपन्यास : उत्तरशती की उपलब्धियाँ, हिंदी कहानी : समीक्षा और संदर्भ, समकालीन हिंदी उपन्यास, हिंदी उपन्यास : विविध आयाम, आस्था और चिंतन।
भोजपुरी साहित्य : के कहल चुनरी रँगाल (ललित निबंध), जनता के पोखरा (काव्य), भोजपुरी कथा- साहित्य के विकास (समीक्षा), ओझइती (कहानी संग्रह), गंगा-जमुना-सरस्वती (विविध विधा), अड़बड़ भइया की भोजपुरी चिट्ठी (फीचर) ।

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