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भारत ही नहीं, आज संपूर्ण विश्व-पटल पर जम्मू कश्मीर के मुद्दे को ज्वलंत समस्या बना दिया गया है । जम्मू कश्मीर की वर्तमान परिस्थितियों पर अनेक लेखकों, पत्रकारों एवं समाज-सेवकों ने अपनी लेखनी चलाई है; किंतु यह पुस्तक अपने आपमें एक अलग ही सच बयां करती है । ' रक्तरंजित जम्मू कश्मीर ' वहाँ के सामाजिक परिवेश का सजीव दस्तावेज है । लेखक रवींद्र जुगरान ने वर्षों वहाँ रहकर आतंकवाद से पीड़ित समाज के दुःखों को प्रत्यक्ष अपनी आँखों से देखा है । इस पुस्तक में लेखक ने जम्मू कश्मीर में नासूर बने आतंकवाद के सभी पहलुओं को अपने प्रत्यक्ष अनुभवों के आधार पर रेखांकित किया है । कश्मीर घाटी में शांति के प्रयासों के तहत विभिन वर्गों, उग्रवादी संगठनों तथा सरकार के बीच बातचीत के मुद्दे क्या हों, बातचीत में किनको शामिल किया जाए, बातचीत किनसे की जाए-से महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर जनसामान्य और सरकार का ध्यान इस पुस्तक के माध्यम से आकृष्ट कराया गया है । आतंकवादियों द्वारा कश्मीर घाटी में किस प्रकार हिंदुओं एव मुसलमानों के बीच घृणा पैदा को गई; हत्या, बलात्कार, अपहरण आदि के कैसे-कैसे घिनौने तांडव किए गए-इन सबको पाठकों के सामने रखने का उद्देश्य यह है कि वे जान सकें कश्मीर का सच क्या है, शत्रु राष्ट्र का षड्यंत्र कितना और कहाँ तक सफल हो पाया है! हमें विश्वास है कि यह पुस्तक राष्ट्र प्रहरियों एवं जम्मू कश्मीर के त्रस्त समाज को आतंकवादियों से लड़ने का संबल प्रदान करेगी!
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अनुक्रम
प्रस्तावना — Pgs. ९
मेरा नम्र निवेदन — Pgs. ११
१. भौगोलिक-सांस्कृतिक परिदृश्य — Pgs. १३
२. आतंकवाद की पृष्ठभूमि — Pgs. २५
३. अलगाववाद की सियासी चाल — Pgs. ४५
४. आतंकवाद की तैयारी — Pgs. ५८
५. आतंकवाद का स्वरूप — Pgs. ६८
६. समाज की भूमिका और संघर्ष — Pgs. १००
७. आतंकवादी संगठन का जालतंत्र — Pgs. ११३
८. कश्मीर की स्वायत्तता का प्रस्ताव — Pgs. ११६
९. भारत का शांति प्रयास — Pgs. १२१
१०. पाकिस्तान का रवैया — Pgs. १२५
११. कश्मीर समस्या पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन — Pgs. १३२
१२. आतंकवाद का समाज पर प्रभाव — Pgs. १३९
१३. सरकार, प्रशासन और पुलिस की भूमिका — Pgs. १४६
१४. सामाजिक-राजनीतिक संगठनों की भूमिका — Pgs. १५९
१५. आतंकवाद समाप्त करने के उपाय — Pgs. १७३
१६. जनमानस के विचार — Pgs. १८४
१७. आतंकवादी घटनाओं का विवरण — Pgs. १९८
रवींद्र जुगरान
जन्म : 29 दिसंबर, 1969।
सुपरिचित लेखक, पत्रकार, कवि और सामाजिक कार्यकर्ता। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक, हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयागराज से पत्रकारिता एवं जनसंचार में विशारद तथा योग प्रशिक्षक अनुसंधान केंद्र से योगाचार्य की उपाधि प्राप्त की है।
अनेक पुस्तकों के रचयिता, अनेक पत्र-पत्रिकाओं में लेख, कविता, कहानी आदि प्रकाशित होते रहते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में जम्मू कश्मीर में दस वर्षों तक कार्य करते हुए देशहित और सामाजिक उत्थान के लिए अथक प्रयास किए। इस दौरान सामाजिक कार्य करते हुए अनेक बार आतंकवादियों के चंगुल में फँसने से बाल-बाल बचे।
अनेक पुरस्कारों से सम्मानित । वर्तमान में योगाचार्य, सामाजिक कार्यों का निर्वहण करते हुए पत्रकारिता एवं स्वतंत्र लेखन के साथ-साथ सत्यान्वेषण अनुसंधान के आध्यात्मिक अनुभव की साधना में रत हैं।
Email ID : ravinder.jugran1@gmail.com
Twitter ID : @JugranRavinder