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"भारत में सामाजिक मूल्यों और सनातन संस्कृति की विरासत को सहेजने में परिवार-व्यवस्था ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। परिवार की आधारशिला नारी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि सृजन की शक्ति व सहनशीलता की प्रतिमूर्ति है। जीवन की अनंत चुनौतियों के मध्य उसका संघर्ष और संकल्प अडिग है।
युवाओं में अथाह ऊर्जा का संचार भारत को विकसित भारत की ओर अग्रसर कर रहा है। वहीं आज के बच्चे, जो कल का भविष्य हैं, जो हमारी विरासत को सँजोकर रखेंगे और इसके ध्वजवाहक बनेंगे, किंतु परिवार की इन सभी इकाइयों के सामने तीव्र गति से बढ़ती तकनीकी ने अवसरों के साथ असंभावित चुनौतियाँ भी दी हैं।
'परिवार मणिका' पुस्तक हमें सांस्कृतिक मूल्यों की ओर लेकर जाती है, लेकिन मूल्यों पर आघात हमारे 'स्व' की सबसे बड़ी चुनौती है। इस पुस्तक में आधुनिक समाज की चुनौतियों के साथ भारतीय जीवन-मूल्यों का सम्यक् परिचय कराया गया है।"