माहिष्मती का योद्धा सहस्रार्जुन' यह कहानी है सतयुग और त्रेतायुग के मध्य की, जब युग परिवर्तन को नई दिशा देने के लिए स्वयं सुदर्शन चक्र का अवतार हुआ। इस कहानी में उस काल की परिस्थितियों, युद्ध, द्वंद्व, समाज, आक्रोश, खोज, नवाचार के साथ आर्यावर्त का इतिहास शामिल है। पुराणों की कहानियों के साथ भारतीय इतिहास के दशराग्य युद्ध की विकरालता व माहिष्मति, इंद्र, परशुराम, रावण, वशिष्ठ, विश्वामित्र की विचार-द्वंद्वता का सरसतापूर्ण वर्णन इस उपन्यास में है।