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"आधुनिक चिंतन की पृष्ठभूमि पुरानी परंपराओं, रीति-रिवाजों, रूढ़ियों की अपेक्षा ज्ञान एवं विज्ञान की नवीनता एवं आधुनिकता पर आधारित है। आधुनिक चिंतन ऐसी विशाल और बहुआयामी चिंतन प्रक्रिया है, जिसने मनुष्य के विकास के बारे में बात की है। मनुष्य का विकास केवल औद्योगिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है अपितु उसने ज्ञान के क्षेत्र में भी बौद्धिक विकास किया है। आधुनिक चिंतन केवल दर्शन पक्ष की बात नहीं करता, वह बात करता है विज्ञान, कला, समाजशास्त्र, राजनीति और प्रौद्योगिकी में हुए परिवर्तनों की।
इसके साथ ही अगर आधुनिकता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की बात करें तो इसका प्रारंभधर्मसुधार आंदोलन, पुनर्जागरण और वैज्ञानिक क्रांति के नाम पर आई औद्योगिक क्रांति के साथ देखने को मिला है। तत्कालीन समय में मनुष्य-आधारित तर्कसंगत दृष्टि, स्वतंत्रता का भाव एवं उसके अनुभूतिपरक, अनुभवजन्य दृष्टिकोण को महत्ता दी गई, जिससे ज्ञान एवं सत्य की ओर मनुष्य को अग्रसर होने में सहायता मिली। इसके बावजूद वर्तमान में परंपरा और आधुनिकता का समन्वय देखा जा सकता है।"