Prabhat Prakashan, one of the leading publishing houses in India eBooks | Careers | Events | Publish With Us | Dealers | Download Catalogues
Helpline: +91-7827007777

Loknayak Jaiprakash Narayan   

₹250

In stock
  We provide FREE Delivery on orders over ₹1500.00
Delivery Usually delivered in 5-6 days.
Author Pankaj Kishore
Features
  • ISBN : 9789347273599
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Pankaj Kishore
  • 9789347273599
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2025
  • 80
  • Hard Cover
  • 150 Grams

Description

लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्तूबर, 1902 को बिहार के सारण जिले के सिताबदियारा गाँव में हुआ। पढ़ाई में वे शुरू से ही कुशाग्र थे, इसलिए राजनीतिशास्त्र और समाजशास्त्र में बी.ए. एवं एम.ए. अमेरिका से किए। सन् 1929 में पं. नेहरू के आमंत्रण पर वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए। इस दौरान महात्मा गांधी उनके गुरु और पथ-प्रदर्शक बने। स्वतंत्रता और गांधीजी के निधन के बाद जयप्रकाश नारायण, आचार्य नरेंद्र देव और बसावन सिंह ने पहली विपक्षी सोशलिस्ट पार्टी का गठन किया। बाद में उसका नाम प्रजा सोशलिस्ट पार्टी कर दिया गया। जयप्रकाश नारायण का कहना था कि सिर्फ शासक बदलने से समस्या का हल नहीं होता, जब तक कि सारी व्यवस्था में आमूल परिवर्तन न हो। चंबल के चार सौ डाकुओं का समर्पण; बिहार में अराजक सत्ता व्यवस्था, कुशिक्षा, अपराध व अराजकता के खिलाफ ऐतिहासिक छात्र आंदोलन; व्यवस्था में बदलाव के लिए संपूर्ण क्रांति के आह्वान से लेकर केंद्र में इंदिरा गांधी की तत्कालीन सरकार को सत्ता से उखाड़कर लोकतंत्र की बहाली तक जयप्रकाश नारायण ने विविध सत्याग्रही भूमिकाओं का निर्वहण किया। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने इस देश में सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन लाने के लिए एक संपूर्ण क्रांति का सपना देखा और देश के सम्मुख उसे प्रस्तुत किया। प्रस्तुत है स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद के क्रांतिकारी विचारक, दूरद्रष्टा और समाज में चेतना जगानेवाले लोकनायक की पठनीय एवं प्रेरणादायी जीवनी।.

The Author

Pankaj Kishore

स्वतंत्र लेखक। दिल्ली विश्‍व-विद्यालय से वाणिज्य में स्नातक और भारतीय विद्या भवन, दिल्ली से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्‍लोमा प्राप्‍त किया। अल्पायु में ही लेखन प्रारंभ। 15 पुस्तकें एवं 25 मौलिक रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।

Customers who bought this also bought

WRITE YOUR OWN REVIEW