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यह केवल एक पुस्तक नहीं है, बल्कि भारत की खुफिया दुनिया की वह खिड़की है, जो अब तक आम लोगों के लिए बंद थी। भारतीय खुफिया एजेंसियों, खासकर IB और रॉ (R&AW) को लेकर न सिर्फ आम जनता, बल्कि मीडिया, सुरक्षा विश्लेषकों और सैन्य अधिकारियों के बीच भी कई तरह की गलतफहमियाँ थीं। लेकिन यह पुस्तक उन तमाम परतों को एक-एक कर खोलती है, वह भी सरल, सटीक और बेधड़क अंदाज में। खासकर उस नई पीढ़ी के लिए, जो बिना लाग-लपेट के भारत की सुरक्षा प्रणाली को समझना चाहती है।
पुस्तक की शुरुआत वहीं से होती है, जहाँ से भारत की खुफिया कहानी का आरंभ हुआ-वर्ष 1904 में, जब अंग्रेजों ने 'ठगी और डकैती' विभाग बनाया। और फिर कैसे यही विभाग समय के साथ विकसित होकर R&AW यानी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग बना।
इस एजेंसी के संस्थापक आर.एन. काव जासूसी में उस स्तर के महारथी थे, जिन्होंने सिक्किम के 3000 वर्ग मील को भारत में मिलाकर CIA के रिचर्ड हेल्प्स, ब्रिटेन के M16 या इजरायल के मोसाद को भी पीछे छोड़ दिया था। काव ने असंभव को संभव बना दिया, जब उन्होंने सीमा पर चीनी आक्रमण के मँडराते खतरे के बीच इस काम को पूरा किया, जिसकी मिसाल दुनिया में आज भी नहीं है।
भारतीय खुफिया एजेंसी (R&AW) के विषय में एक संपूर्ण पुस्तक, जो अनेक भ्रम और भ्रांतियों को दूर कर हर भारतीय के मन में सुरक्षा तंत्र को लेकर आश्वस्ति का भाव जाग्रत् करेगी।