Prabhat Prakashan, one of the leading publishing houses in India eBooks | Careers | Publish With Us | Dealers | Download Catalogues
Helpline: +91-7827007777

Dr. Kalam Guru Gyan   

₹400

In stock
  We provide FREE Delivery on orders over ₹1500.00
Delivery Usually delivered in 5-6 days.
Author Srijan Pal Singh
Features
  • ISBN : 9789352660834
  • Language : Hindi
  • ...more

More Information about International Finance: Theory and Policy, 10th ed.

  • Srijan Pal Singh
  • 9789352660834
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 2017
  • 200
  • Hard Cover

Description

डॉ. कलाम को देश के युवाओं में अगाध विश्वास था। वे देश के कल्याण को लेकर इस कदर चिंतित रहते थे कि अपने जीवन के आखिरी दो घंटे उन्होंने आतंक और संसद् की काररवाई ठप होने के खतरों पर चर्चा करते हुए बिताए थे। अपने आखिरी क्षणों में भी उनका भरोसा कायम था कि युवा, खास तौर पर छात्र तमाम पीड़ादायी मुद्दों के समाधान लेकर देश के लिए आगे आएँगे। नई पीढ़ी के प्रज्वलित मस्तिष्क के प्रति उनका विश्वास हमेशा बना रहा, जिसे वे धरती पर सबसे बहुमूल्य उपहार मानते आए थे। 
मुझे इस महान् आत्मा के साथ बेहद करीब से काम करने का मौका मिला। लोगों के लिए भले वे मिसाइलमैन रहे हों, मेरे लिए वो हमेशा ‘स्माइलमैन’ ही रहेंगे। दुनिया ने उन्हें अंतरिक्ष विज्ञानी के तौर पर देखा, जिसने उपग्रहों को धरती के चारों ओर घूमते हुए देखा। मैंने उन्हें एक महान् आत्मा के तौर पर देखा, जिसने लोगों को सपने देखने का उपहार दिया—सपने और उनको सच करने का साहस प्रदान किया। दुनिया ने मात्र उनके कामों को देखा, जबकि मैं खुशकिस्मत रहा कि मुझे उनके भावनात्मक हिस्से का भी गवाह बनने का मौका मिला। वे एक वैज्ञानिक, संत, लेखक, शिक्षक, कवि और दार्शनिक थे, सब मिलाकर वे स्नेह और बुद्धिमत्ता का एक पुंज थे।
आइए, अब मैं आपको एक हैरतअंगेज सफर पर ले चलता हूँ—एक ऐसा सफर, जिस पर चलते हुए मैंने डॉ. कलाम से काफी कुछ सीखा।

__________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________

 

अनुक्रम

परिचय—5

आभार—11

1. पहली छाप —15

2. पदकों के साथ बढ़ती जाती है जिम्मेदारी —19

3. आलोचना के साथ भारी कर्ज भी आता है—26

4. कठोर परिश्रम को सबसे ज्यादा सम्मान का हक —29

5. मुझे किसलिए याद रखा जाना चाहिए? —32

6. गंभीर हालात आपकी छिपी प्रतिभा को उभारते हैं—35

7. चमकदार विचारोंवाला बुजुर्ग जनरल—40

8. समाधान के बारे में सोचो, भले ही वह बेहद ठोस हो—45

9. सबसे बड़ा आशीर्वाद—48

10. अप्रैल लूमर —52

11. जीवनदायी है जल—55

12. वहाँ बीच में कोई साथी है—61

13. अपनी माँ के चेहरे पर मुसकान बिखेरो—66

14. विज्ञान और अध्यात्म—72

15. अगर आप बीते हुए कल से कुछ लेंगे तो

भविष्य में कर्ज तले दब जाएँगे—81

16. धरातल से उठती आवाजों पर ध्यान दो —86

17. राष्ट्रपति चुनाव, 2012—89

18. शिक्षा से कहीं परे है बुद्धिमा—102

19. आजादी की चाय—111

20. आपने शादी यों नहीं की?—117

21. अगर आप भय को नियंत्रित नहीं कर सकते,

तो उस पर ध्यान न दीजिए—119

22. मेरा एकमात्र अफसोस —125

23. शतादी समारोह—128

24. प्रदान करने में मैंने जीवन का मंत्र सीखा—131

25. मतभेदों का सम्मान और जश्न—135

26. पिचर परफेट!—140

27. खुद पर हो एतबार, तो जोखिम जरूर लें—144

28. ये मेरे लोग हैं—150

29. कुछ देने के लिए जिओ—156

30. स्नेह और सहानुभूति के रंगों में समाहित है अच्छाई—159

31. मिसाइलमैन से स्माइलमैन तक—164

32. यथोचित विरासत—167

33. महानता का पथ है विनम्रता—173

34. प्रेम का योद्धा —176

35. सेवा परमो धर्म:—179

36. मैं उन्हें फिर से सुनना चाहता हूँ—183

37. बाह्य शिक्षक—187

38. अंतिम आठ घंटे : एक शिक्षक सदा के लिए—191

उपसंहार—199

The Author

Srijan Pal Singh

सृजन पाल सिंह को भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद में सर्वश्रेष्‍ठ विद्यार्थी के रूप में स्वर्णपदक प्रदान किया गया। वे छात्र परिषद् के प्रमुख भी रहे। वर्तमान में वे पुरा (PURA) को टिकाऊ विकास प्रणाली के रूप में विकसित करने के लिए डॉ. कलाम के साथ कार्य कर रहे हैं।
facebook.com/SrijanPalSingh

Customers who bought this also bought

WRITE YOUR OWN REVIEW