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"यह इतिहास के एक उपेक्षित पात्र को लेकर गढ़ी गई एक रचना है। इसके कुछ पात्र वास्तविक हैं, कुछ काल्पनिक । कुछ घटनाएँ वास्तविक हैं, कुछ काल्पनिक । मैंने कुछ ऐतिहासिक तथ्यों तथा जनश्रुतियों को लेकर एक रोचक कथानक तैयार करने का प्रयास किया है। इसमें इतिहास ढूँढ़ने का कोई भी प्रयास निरर्थक होगा। हिंदी साहित्य में इतिहास और मिथिहास के उपेक्षित पात्रों को लेकर प्रबंध काव्य और उपन्यास लेखन की एक परंपरा रही है। इसे उसी श्रृंखला की एक कड़ी के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
बौद्ध काल का उपेक्षित पात्र देवदत्त एक ऐसा पात्र है, जिसके बारे में बौद्ध साहित्य में भी बहुत कम जानकारी मिलती है। जितना लिखा गया है, उसमें उसे पूरी तरह एक खलनायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। हिंदी साहित्य में भी उस पर केंद्रित कोई रचना नहीं मिलती। मैंने सोचा कि वह नायक तो नहीं था, लेकिन यदि उसका हृदय-परिवर्तन हो जाता और वह सहनायक की भूमिका में आ जाता तो उसकी कहानी क्या होती। यहीं से इस कथानक का बीजारोपण हुआ और धीरे-धीरे इसका ताना-बाना आकार लेने लगा। लंबे समय के चिंतन के बाद यह एक उपन्यास के स्वरूप में ढलने लगा, जो आपके सामने है।"
शंभू शिखर
जन्म : 10 जनवरी, 1984 को सौराठ, मधुबनी (बिहार) में।
शिक्षा : स्नातकोत्तर (रणनीति शास्त्र) दिल्ली विश्वविद्यालय)।
रचना-संसार : सिलवटों की महक (गजल संग्रह), संन्यासी योद्धा (स्वामी विवेकानंद जीवनी), आर्गेनिक लव (लघु उपन्यास), बात पते की (लघु कथा-संग्रह), सन्नाटे की गूँज (कोरोना काल की सच्ची कहानियाँ)।
20 बरसों से हिंदी कवि-सम्मेलनों में सक्रिय भागीदारी। 24 से अधिक विदेश यात्राएँ।
विभिन्न समाचार चैनलों पर 300 से अधिक प्रस्तुति।
स्थायी पता : ई-2102, सवियर ग्रीन आर्च, टेक्डजोन-4, ग्रेटर नोएडा वेस्ट-201306 (उत्तर प्रदेश)
इ-मेल : shambhushikhar@gmail.com