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Author Viveki Rai
Features
  • ISBN : 8188267090
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
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  • Viveki Rai
  • 8188267090
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2011
  • 204
  • Hard Cover

Description

‘‘अच्छा, एक बात बताओ, चोट मात्र कंधे पर है और साधारण ही है तो इतने लोग यहाँ क्यों इकट्ठे हैं?’’ ‘‘मेला है न! जो उधर से लौटता है, यहाँ हाल-चाल पूछने आ जाता है। गाँव में बहुत हिले-मिले रहते हैं ज्ञानेश्‍वर बाबू, बहुत लोकप्रिय हैं। जो सुनता है चोट की खबर, दु:खी होता है!...अब आप लोग देर न करें। दिन शेष नहीं है।’’
‘‘अच्छा, बस एक और शंका है, बच्चे! ये बाबा इतने अधीर होकर तथा फफक-फफककर लगातार रो क्यों रहे हैं?’’
जब तक वे वहाँ पहुँचे, एक भारी भीड़ पहुँच गई। एक ऐसी भीड़, जिसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ रही हैं। उत्तर जानते हुए भी शोकाकुल के चेहरे पर वही प्रश्‍न—कैसे क्या हुआ? शिवरात्रि के अवसर पर घटित इस अशिव दिन ने पूरे गाँव-जवार को कँपा दिया। शोक-त्रास और अशुभ-अमंगल चरम सीमा पर पहुँचकर लोगों को इस प्रकार भीतर से मथने लगा कि उसकी अभिव्यक्‍त‌ि गहरी खामोशी में होने लगी। अधिक देर कहाँ लगी, थोड़ी देर में ही सारी स्थिति सर्वत्र साफ हो गई। एक अति छोटे क्षण की छोटी सी चूक, जो एक घटना के रूप में परिवर्तित हुई और फिर एक दुर्घटना के रूप में उसकी परिणति ऐसी हो गई कि उसका जिक्र करते भी लोग काँप जाते हैं। उसका नाम मुँह से नहीं कढ़ता। जितना बन पड़ता है, लोग उसे छिपाते हैं।
मैं महसूस करता—ये कंधे बहुत मजबूत हैं; हम सबको, पूरे परिवार को सुरक्षित जीवन-यात्रा के लिए आश्‍वस्त करते हैं। एक गर्व भीतर कहीं सिर उठाकर मचलता है—यह मेरा पुत्र नहीं, मित्र है, अभिभावक है और पिता के अभाव की पूर्ति करता है।...मैंने अपने पिता को तो नहीं देखा, वे मेरे जन्म के डेढ़-दो मास पहले ही परलोकगामी हो गए, किंतु इस पुत्र को देख रहा हूँ, ऐसे ही वे रहे होंगे।...हाँ, तू ऐसा ही है कि मैं निश्‍च‌ित हूँ।
—इसी उपन्यास से

The Author

Viveki Rai

जन्म : 19 नवंबर, 1924, गाँव-भरौली, जिला-बलिया (उ.प्र.)।

काव्य : अर्गला, रजनी गंधा, यह जो है गायत्री ।
कहानी संग्रह : जीवन परिधि, गूँगा जहाज, नई कोयल, कालातीत, बेटे की बिक्री, चित्रकूट के घाट पर, विवेकी राय की श्रेष्‍ठ कहानियाँ ।
उपन्यास : बबूल, पुरुष पुराण, लोकऋण, श्‍वेतपत्र, सोनामाटी, समर शेष है, मंगल भवन, नमामि ग्रामम् अमंगलहारी ।
ललित निबंध : फिर बैतलवा डाल पर, जलूस रुका है, गँवई गंध गुलाब, मनबोध मास्टर की डायरी, नया गाँवनामा, मेरी श्रेष्‍ठ व्यंग्य रचनाएँ, आम रास्ता नहीं है, जगत् तपोवन सो कियो ।
निबंध और शोध समीक्षा : त्रिधारा, गाँवों की दुनिया, किसानों का देश, अध्ययन आलोक, स्वातंत्र्योत्तर कथा -साहित्य और ग्राम-जीवन, हिंदी।

उपन्यास : उत्तरशती की उपलब्धियाँ, हिंदी कहानी : समीक्षा और संदर्भ, समकालीन हिंदी उपन्यास, हिंदी उपन्यास : विविध आयाम, आस्था और चिंतन।
भोजपुरी साहित्य : के कहल चुनरी रँगाल (ललित निबंध), जनता के पोखरा (काव्य), भोजपुरी कथा- साहित्य के विकास (समीक्षा), ओझइती (कहानी संग्रह), गंगा-जमुना-सरस्वती (विविध विधा), अड़बड़ भइया की भोजपुरी चिट्ठी (फीचर) ।

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