Braj ke Lokgeeton ka Yon Manovishleshan

Braj ke Lokgeeton ka Yon Manovishleshan   

Author: Ram Singh
ISBN: 9789383111473
Language: Hindi
Edition: 1st
Publication Year: 2014
Pages: 104
Binding Style: Hard Cover
Rs. 150
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Description

इस संसार में प्रत्येक व्यक्‍त‌ि सुखमय एवं आनंदमय जीवन जीने की नैसर्गिक आकांक्षा रखता है, क्योंकि सभी प्राणी आनंद की कोख से उत्पन्न हैं। अतः वे आनंद में ही जीवित रहते हैं—‘आनन्देन जीवन्ति।’ इस आनंद की संप्राप्‍त‌ि के लिए मनुष्य सतत प्रयत्‍नशील रहता है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चार पुरुषार्थ हैं जिसमें काम की अहम भूमिका रहती है, क्योंकि वह सृष्‍ट‌ि का मूलाधार है।
काम जीवन की सनातन संचेतना है, प्रीति की रीति है और संवेगात्मक आत्मा। वात्स्यायन के अनुसार जीने की कला है। फ्रायड ने काम को मानव की जिजीविषा कहा है, उसकी संतृप्‍त‌ि के बिना शरीर और मस्तिष्क में अनेक रोग हो जाते हैं। काम प्रेम की कला है, जो नर-नारी में आनंदानुभूति संपादित करती है। अलौकिक आनंद की विधायिनी है, सहवासिक क्षरण की चरम परणति, सरस और मधुसिक्त।
लोकगीत लोकजीवन की सहज और सरस अनुभूतियों, विचारों और भावनाओं की लोकवाणी में मार्मिक अभिव्यक्‍त‌ि हैं। लोकगीत पारदर्शी जीवाश्म है, जिनमें लोक मानव के रीति-रिवाज, मान्यताएँ, धारणाएँ, हर्ष-विषाद तथा चिराचरति आचरण प्रतिबिंबित होते हैं। ब्रज के इन लोकगीतों में यौन मनोवृत्ति का सरस विश्‍लेषण है, जो न केवल पठनीय है, बल्कि मनोरंजक भी है।

 

The Author
Ram Singh

जन्म : 15 जुलाई, 1934 को नगला पांडव, जनपद-एटा (उ.प्र.) में।
शिक्षा : एम.ए. (हिंदी, समाजशास्त्र, इंग्लिश), पी-एच.डी. (आगरा विश्‍वविद्यालय)।
प्रकाशन : ‘ब्रज का देवपरक लोक साहित्य एवं संस्कृति’ (शोध), ‘जाहरपीर’, ‘दिव्यात्मा’, ‘ईश्‍वर कहाँ गया’ (उपन्यास), ‘क्रांतिदूत मुलायम सिंह’, ‘अमीर खुसरो’, ‘अशफाकउल्ला खाँ’ (जीवनी), ‘चंद्रशेखर आजाद’, ‘ताज महल’, ‘रिटायरमेंट के बाद सुखी जीवन’ (खंड काव्य), ‘श्याम तेरी बंसी बजे धीरे-धीरे’ (ब्रज के कृष्णपरक लोक गीतों का संकलन), ‘बुढ़ापा विज्ञान’, ‘बहनों से दो बातें’, ‘The way of Smart Living’, ‘Taj Mahal’ (A Ballad in English), ‘Life after Retirement’, ‘Mulayam Singh: A Political Biography’।
अध्यक्ष, अमीर खुसरो फांउडेशन, राजनैतिक एवं सामाजिक चेतना के अनेक लेख, ऑल इंडिया रेडियो पर अनेक वार्त्ताओं का प्रसारण।
संप्रति : सृजन के साथ-साथ शिक्षा एवं सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय।
संपर्क : 20 सुनहरी नगर, एटा (उ.प्र.)। दूरभाष :09456444894

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