₹500
भारतीय शिक्षा दर्शन' : सिद्धांत, परंपरा परंपरा एवं व्यवहार, भारतीय शिक्षा के बहुआयामी स्वरूप का गहन अध्ययन प्रस्तुत करने वाला शोधपरक ग्रंथ है। चार खंडों में विभाजित इस पुस्तक के पहले भाग में भारतीय शिक्षा के दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक, आध्यात्मिक और सामाजिक-आर्थिक आधारों के साथ-साथ पंचकोशीय विकास तथा पंचपदी शिक्षण पद्धति जैसी मौलिक विधियों पर प्रकाश डाला गया है। अन्य तीन भागों में क्रमशः अवतारी पुरुषों एवं संतों के आध्यात्मिक उपदेश, शिक्षाविदों के प्रयोगात्मक प्रयास और चिंतकों के विश्लेषण के माध्यम से यह पुस्तक शिक्षा की समग्र अवधारणा को प्रस्तुत करती है।
यह पुस्तक प्रमाणित करती है कि भारतीय शिक्षा केवल औपचारिक ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन, चरित्र-निर्माण और सामाजिक परिवर्तन का सशक्त उपकरण रही है। यह पुस्तक भारतीय संस्कृति और शिक्षा-परंपरा के मूलभूत सिद्धांतों, जैसे गुरु-शिष्य परंपरा, वेदांत दर्शन, योग, उपनिषदों के शिक्षण तरीकों आदि को सरल एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है।
वर्तमान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में यह विशेष रूप से प्रासंगिक है, क्योंकि यह भारतीय ज्ञान-परंपरा, कौशल विकास और समग्र व्यक्तित्व निर्माण को नई दिशा देने वाली कृति । शिक्षकों, शोधार्थियों और नीति-निर्माताओं के लिए यह पुस्तक दार्शनिक दृष्टि और व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करती है।
रवि कुमार—
शिक्षा : उत्पादन अभियांत्रिकी ।
कार्यक्षेत्र: सन् 2003 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक; वर्तमान में विद्या भारती में जोधपुर प्रांत संगठन मंत्री।
संपादन-संकलन : हम निर्माण-कर्ता हैं या सृष्टिकर्ता?
लेखन : विज्ञानमय भारत : अतीत, वर्तमान और भविष्य, बाल केंद्रित क्रिया आधारित शिक्षा, भारतीय जीवनशैली तथा 85 से अधिक लेख विभिन्न पत्रिकाओं एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित ।
मुख्य संपादक : डिजिटल प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय शिक्षा पोर्टल (राष्ट्रीयशिक्षा. कॉम)
डॉ. कुलदीप कुमार मेहंदीरत्ता कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के सहायक आचार्य एवं महात्मा गांधी ऑल इंडिया सर्विसेज कोचिंग संस्थान के उप निदेशक हैं। शोध के क्षेत्र में उनका योगदान महत्त्वपूर्ण है। उनके 15 से अधिक शोध-पत्र शोध-पत्रिकाओं में तथा 50 से अधिक लेख विभिन्न समाचार-पत्रों और वेबसाइट पर प्रकाशित हैं। वे 'गांधियन वर्ल्ड ऑर्डर' पुस्तक के लेखक और 'गुरु नानक देव : काव्य और चिंतनधारा' के सह-संपादक हैं।