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"पुस्तक 'पंच परिवर्तन : राष्ट्रोत्थान की संघ दृष्टि' आधुनिक भारत की आकांक्षाओं और भारतीय चिंतन की शाश्वत धारा के बीच सेतु का कार्य करती है। यह स्पष्ट करती है कि विकसित भारत का जो स्वप्न आज 140 करोड़ भारतीय देख रहे हैं, उसकी जड़ें 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के विचारों में अंकुरित हो चुकी थीं। भारतमाता के परम वैभव का जो स्वप्न संघ ने देखा, वही आज विश्वगुरु भारत की आशा और आकांक्षा के रूप में परिलक्षित हो रहा है।
संघ शताब्दी सोपान पर इस पुस्तक का केंद्रीय विचार भी पंच परिवर्तन है, जिसमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, स्व-जागरण, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों की चेतना को राष्ट्रीय उत्थान के पाँच स्तंभों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
पूज्य गुरुजी ने भारत को एक सांस्कृतिक जीवसत्ता के रूप में देखा, जो अखंड, अविनाशी और धर्म-आधारित राष्ट्र है। उनके लिए देशभक्ति मात्र भौगोलिक निष्ठा न होकर राष्ट्र के सांस्कृतिक लक्ष्य के प्रति आध्यात्मिक समर्पण थी। आज पंच परिवर्तन का यह विचार इसी भाव को और पुष्ट करते हुए न केवल भारत अपितु वैश्विक स्तर पर मुँह बाए खड़ी चुनौतियों व समस्याओं का भी निदान प्रस्तुत करेगा।"
इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर एवं आईआईएम कलकत्ता से आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन की शिक्षा प्राप्त । सतत विकास आधारित प्रौद्योगिकी, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और ऑपरेशनल एक्सीलेंस के विशेषज्ञ के रूप में एक दशक विश्व की कई जानी-मानी कंपनियों में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। वर्तमान में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में स्ट्रेटेजिक सोर्सिंग और प्रोक्योरमेंट सलाहकार के रूप में काम कर रहे हैं। मूलतः उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर, जनपद के निवासी; 2006 से नोएडा में निवास ।
शिवेश प्रताप भारत सहित विश्व भर की नीतियों, आर्थिकी एवं विकास कार्यों में गहरी रुचि रखते हैं। इनके लेख दैनिक जागरण, भास्कर, ऑर्गनाइजर समेत लगभग सभी प्रमुख समाचार पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। समाचार चैनलों पर नीतियों एवं विकासपरक चर्चाओं में भी सहभागिता । हिंदी, अंग्रेजी, जर्मन और संस्कृत भाषाओं में दक्ष । इंटरनेट पर पिछले 6 वर्षों से एक सफल ब्लॉगर और डिजिटल कंटेंट डेवलपर के रूप में संस्कृत भाषा और प्राचीन भारतीय ग्रंथों के डिजिटलीकरण एवं संवर्धन हेतु सक्रिय । स्थायी पता : देवरिया गंगा, जनपद संतकबीरनगर- 272175 (उ.प्र.)
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