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Bharat Mein Saman Nagrik Sanhita: (Uniform Civil Code)   

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Author Dr. Pramod Kumar Agrawal
Features
  • ISBN : 9789355626943
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Dr. Pramod Kumar Agrawal
  • 9789355626943
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2025
  • 192
  • Soft Cover
  • 200 Grams

Description

"समान नागरिक संहिता राष्ट्र की पहचान है।

भारत में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता संविधान के अनुच्छेद 44 में नीति निदेशक तत्त्व के रूप में व्यक्त की गई है।

भारत के संविधान के सन् 1950 में लागू होने के पश्चात् इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, जबकि उच्चतम न्यायालय बार-बार सरकार को सजग करता रहा। सन् 1995 में उच्चतम न्यायालय ने सरला मुद्गल बनाम भारत संघ मामले में तो समान नागरिक संहिता पर त्वरित कार्यवाही करने की सलाह दी।

प्रायः भारत की अस्सी प्रतिशत हिन्दू आबादी के स्वीय विधि अधिनियम बन चुके हैं। गोवा राज्य में समान नागरिक संहिता लागू है और संप्रति उत्तराखंड राज्य ने भी सन् 2024 में समान नागरिक संहिता अपने क्षेत्र में साहस के साथ लागू कर दी है।

इस पुस्तक में समान नागरिक संहिता को लागू करने के पीछे ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को प्रस्तुत किया गया है विशेषतः भारतीय संविधान परिषद् में तत्संबंधी चर्चा जो आज भी प्रासंगिक है।

विश्व के अनेक इस्लामिक देशों में भी बहु-विवाह प्रथा पर रोक लग गई है पर भारत में बहु-विवाह तथा अन्य विषय अभी भी विवादित बने हुए हैं। उच्चतम न्यायालय के समान नागरिक संहिता से संबंधित महत्त्वपूर्ण निर्णयों से तथ्यों को निकालकर सभी आयामों पर प्रकाश डाला गया है। पुस्तक के अंत में व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ भी दी गई हैं ताकि विषय एवं पुस्तक सहज ग्रहण हो।

आशा है कि इस पुस्तक का, भारत में समान नागरिक संहिता जैसे ज्वलंत विषय पर सभी वर्गों, धर्मों, जातियों, विधि-विशेषज्ञों, विधायिका तथा पाठकों द्वारा समान रूप से स्वागत किया जाएगा।"

The Author

Dr. Pramod Kumar Agrawal

डॉ. प्रमोद कुमार अग्रवाल
बरुआसागर, जिला-झाँसी (उत्तर प्रदेश) में जन्मे डॉ. प्रमोद कुमार अग्रवाल हिंदी के प्रख्यात उपन्यासकार, कहानीकार एवं लेखक हैं। अभी तक डॉ. अग्रवाल की हिंदी और अंग्रेजी में पैंसठ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी भारतीय वाङ्मय पर अन्य प्रमुख कृतियाँ हैं—‘रामचरितमानस-नाट्य रूप’, ‘मैं राम बोल रहा हूँ’, ‘भगवद्गीता : नाट्य रूप’, ‘राधा की पाती : कृष्ण के नाम’ और ‘संजय-धृतराष्ट्र संवाद’। डॉ. अग्रवाल का कृतित्व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय तथा हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग द्वारा सम्मानित हो चुका है। भारतीय प्रशासनिक सेवा से अवकाश ग्रहण करने के पश्चात् संप्रति साहित्य के माध्यम से समाज-सेवा में समर्पित हैं।

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