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Antim Asur | Story of The Aghori   

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Author Gyan Singh
Features
  • ISBN : 9789379740090
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1sr
  • ...more

More Information

  • Gyan Singh
  • 9789379740090
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1sr
  • 2026
  • 152
  • Soft Cover
  • 200 Grams

Description

"देवों और असुरों की प्रतिस्पर्धा और युयुत्सा किसी से छीपा नहीं है। परंतु द्वापर में हारने के बाद असुर इतने कमजोर हो गए कि वे देवों के दास बन गए, और इसलिए बहुत वर्षों तक दोनों पक्षों में शांति बनी रही। लेकिन राजा मृत्युंजय के शासन में असुर फिर से सशक्त हुए और देवताओं के समकक्ष प्रतीत होने लगे।

देवताओं से यह बात सहन नहीं हुई और देवराज इंद्र ने एक षड्यंत्र रचा। वह जहरीली औषधि, जिसके प्रभाव से अहिल्या पत्थर हो गई थी, उसका उपयोग फिर से हुआ और इस बार शिकार हुई एक असुर-कन्या। पर न तो असुर ऋषि थे और न ही उनमें इतना संयम था कि वे श्राप देकर क्षमा कर दें। और फिर शुरू हुआ दोनों तरफ से घात-प्रतिघात का एक सिलसिला।"

The Author

Gyan Singh

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