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"कानों के एक जोड़ी झुमके, अनगिनत यादें
एक अविस्मरणीय सफर...
जब कानों के पुराने झुमके की जोड़ी नूनी के हाथों में आती है तो अज्जा और अज्जी के साथ उसकी शांत छुट्टियाँ जिंदगी के सबसे बड़े रोमांच में बदल जाती हैं। उज्जैन के पवित्र घाटों से लेकर अमृतसर की हलचल भरी सड़कों तक, दिल्ली की ऐतिहासिक गलियों से होते हुए लंदन तक, नूनी एक ऐसे रास्ते पर चलती है, जो रहस्यों और इतिहास की चमक से भरा है।
हर कदम पर उसका सामना प्यार और खोने की उन भूली-बिसरी कहानियों से होता है, जो यह बताती हैं कि असली खजाने सिर्फ सुंदर ही नहीं होते, बल्कि उनमें ऐसी यादें भी छिपी होती हैं, जिन्हें हमेशा जिंदा रखना चाहिए।
भारत की सबसे पसंदीदा कहानीकार के अनोखे अंदाज में लिखी गई 'खोए हुए झुमकों का रहस्य' साहस और विरासत की दिल को छू लेने वाली एक कहानी है। एक ऐसी कहानी, जो पुस्तक के आखिरी पन्ने तक पढ़ लेने के बाद भी लंबे समय तक आपके स्मृति-पटल पर बसी रहती है।"
सुधा मूर्ति का जन्म सन् 1950 में उत्तरी कर्नाटक के शिग्गाँव में हुआ। उन्होंने कंप्यूटर साइंस में एम.टेक. किया और वर्तमान में इन्फोसिस फाउंडेशन की अध्यक्षा हैं। बहुमुखी प्रतिभा की धनी सुधा मूर्ति ने अंग्रेजी एवं कन्नड़ भाषा में उपन्यास, तकनीकी पुस्तकें, यात्रा-वृत्तांत, लघुकथाओं के अनेक संग्रह, अकाल्पनिक लेख एवं बच्चों हेतु चार पुस्तकें लिखीं। सुधा मूर्ति को साहित्य का ‘आर.के. नारायणन पुरस्कार’ और वर्ष 2006 में ‘पद्मश्री’ तथा कन्नड़ साहित्य में उत्कृष्ट योगदान हेतु वर्ष 2011 में कर्नाटक सरकार द्वारा ‘अट्टीमाबे पुरस्कार’ प्राप्त हुआ। अब तक भारतीय व विश्व की अनेक भाषाओं में लगभग दो सौ पुस्तकें प्रकाशित होकर बहुचर्चित-बहुप्रशंसित।