Prabhat Prakashan, one of the leading publishing houses in India eBooks | Careers | Events | Publish With Us | Dealers | Download Catalogues
Helpline: +91-7827007777

Sukhamay Vriddhavastha (Swasth Jeevan Ke 100 Varsh)   

₹500

In stock
  We provide FREE Delivery on orders over ₹1500.00
Delivery Usually delivered in 5-6 days.
Author Dinanath Jhunjhunwala
Features
  • ISBN : 9789375739777
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Dinanath Jhunjhunwala
  • 9789375739777
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 240
  • Soft Cover
  • 250 Grams

Description

"प्रस्तुत पुस्तक 'सुखमय वृद्धावस्था (स्वस्थ जीवन के 100 वर्ष)' वृद्ध लोगों की समस्याओं एवं उनके समाधान का विश्लेषण करती है। वृद्धावस्था वह अवस्था है, जब व्यक्ति की शारीरिक एवं मानसिक क्षमताएँ क्षीण होने लगती हैं, परंतु यह अपार अनुभव की अवस्था है। वृद्धावस्था को जीवन के वृक्ष की परिपक्वता पर लगा फल कह सकते हैं, समग्र जीवन को हमने किस तरह से जिया है, उसका प्रतिबिंब वृद्धावस्था में दिखता है।

अनुभव की समृद्धि से भरपूर यह अवस्था अपनी समस्याओं से भी भरी है, विशेषकर अकेलापन, नई पीढ़ियों में अंतर और कभी शारीरिक एवं कभी मानसिक विवशता, परंतु वृद्धावस्था न तो स्वयं के लिए और न समाज तथा देश के लिए बोझ बने, यही पुस्तक का मूल भाव है। यह जीवन की सबसे समृद्ध एवं परिपक्व अवस्था है। पुस्तक में वृद्धजनों की जीवन-शैली के साथ-साथ उनकी शारीरिक, पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक एवं व्यावसायिक समस्याओं के समाधान प्रस्तुत किए गए हैं।

पुस्तक यह संदेश देती है कि पाठक भी बुढ़ापे के भय से मुक्त हो जाएँ। वृद्धावस्था को भार के रूप में न लें। अगर वृद्धावस्था को भार समझेंगे तो जीवन जीना मुश्किल हो जाएगा, अतः वृद्धावस्था को अपने जीवन की शानदार अवस्था मानें और उत्साह और उमंग से जीएँ। वास्तव में जिसमें उत्साह और उमंग नहीं, वही वृद्ध है।"

The Author

Dinanath Jhunjhunwala

 दीनानाथ झुनझुनवाला
जन्म:22 जनवरी, 1934 को भागलपुर (बिहार) में।
शिक्षा:औद्योगिक रसायन में स्नातक (काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी)।
कृतित्व:'अमृत कलश', 'हास्य कलश', 'प्रेरक चरित्र', 'आपका स्वास्थ्य आपके हाथ', प्रेरक प्रसंग, 'सफल उद्यमी कैसे बनें', 'जीवन के सूत्र', 'वचनामृत', 'वृद्धावस्था की समस्या एवं समाधान', 'इंद्रधनुष' तथा 'प्रेरणास्रोत' कृतियाँ प्रकाशित।
इसके अलावा चार दशकों से पत्र-पत्रिकाओं में समसामयिक विषयों पर सतत लेखन। आकाशवाणी, दूरदर्शन, विश्वविद्यालय, विद्यालय एवं सभाओं में सामयिक विषयों पर वार्त्ता। विभिन्न सभा-सोसाइटियों, औद्योगिक संगठनों में सक्रिय सहयोग एवं सामाजिक कार्यों में क्रियाशील।

 

 

Customers who bought this also bought

WRITE YOUR OWN REVIEW