"हँसी-खुशी, आँसू-आह, पीड़ा-दर्द और वैराग ही जीवन के सारे राग एक साथ क्षितिज पर छिटका देता है इंद्रधनुष । विभिन्न सात रंगों की छटा को जन्म देती है प्रकाश की केवल किरण, जो परावर्तित होकर इंद्रधनुष रूप धरकर जगत् को मोहती है। यही किरण आत्मा है, जो इंद्रधनुषी प्राण लेकर भोग से योग तक सात रंग मानव जीवन में भर देती है।
भोग और योग मानव जीवन के दो सिरे हैं नदी के तट की तरह, जो आपस में कभी नहीं टकराते, लेकिन जब वे ज्ञान-सागर में स्व-अस्तित्व और अहं को डुबो देते हैं, तब न तो भोग रहता है, न योग। देहधारी हंस उड़कर किसी और डाल पर जा बैठता है। जीवन के इन्हीं विभिन्न पहलुओं और रंगों को लेकर छाया है, इंद्रधनुष कल्पनाकाश पर।
पारलौकिक, लौकिक, दैविक और भौतिक जीवन-कथाओं को आधार बनाते हुए मानव जीवन और उसके चरित्र को उजागर करती हैं ये इंद्रधनुषी कथाएँ।"