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"इस पुस्तक में पंजाब के विभाजन का समग्र विवेचन प्रस्तुत करने के साथ-साथ विभाजन की पूरी प्रक्रिया और उससे उत्पन्न त्रासदी को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। इसमें अनगिनत स्थानीय और राष्ट्रीय घटनाओं को एक साथ जोड़कर प्रस्तुत किया गया है, जिससे कि उस दौर की परिस्थितियों और घटनाओं को आत्मसात् किया जा सके। वर्ष 1947 के दौरान पंजाब में घटित लगभग दिन-प्रतिदिन की घटनाओं का क्रमबद्ध विवरण प्रस्तुत करते हुए, विभाजन के उस मानवीय पक्ष को रेखांकित किया गया है, जो मूलतः असहनीय मानवीय पीड़ा, विस्थापन और त्रासदी की गाथा है।
यह पुस्तक समाचार-पत्रों में प्रकाशित तथ्यों एवं अप्रकाशित स्रोतों के आधार पर विभाजन के समय पंजाब से संबंधित घटनाओं का सूक्ष्म अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसके साथ ही, भारत और यूनाइटेड किंगडम से प्राप्त निजी डायरियों, पत्रों, संस्मरणों और प्रत्यक्षदर्शियों के अप्रकाशित स्रोतों का भी उपयोग किया गया है।
प्रशासनिक और सैन्य अधिकारियों के लेख भी सम्मिलित हैं, जिन्होंने विभाजन की घटनाओं को निकट से देखा और उन्हें लिपिबद्ध किया था।
प्रो. तंवर ने इस पुस्तक में तथाकथित तथ्यों के पारंपरिक विवरणों से आगे बढ़कर महत्त्वपूर्ण मुद्दों एवं घटनाओं को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है। उन्होंने लंबे समय से चली आ रही धारणाओं को चुनौती देते हुए 'छोटी कहानियों', 'स्थानीय संवेदनाओं' और 'स्थानीय अनुभवों' को इतिहास के केंद्र में रखा है।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह पुस्तक अत्यंत ही प्रासंगिक है। पंजाब तथा औपनिवेशिक भारत के इतिहास में रुचि रखने वाले अध्येताओं के साथ-साथ सामान्य पाठकों के लिए भी यह पुस्तक महत्त्वपूर्ण और उपयोगी है।"
शिक्षा : एम.ए. (इतिहास) में प्रथम स्थान व सामाजिक विज्ञान संकाय में सर्वाधिक अंक प्रतिशत हेतु सम्मानित। यू.जी.सी. के राष्ट्रीय फैलो (रिसर्च अवार्डी 2002-2005); अध्यक्ष, पंजाब इतिहास कांग्रेस (मॉडर्न 2001); प्रथम अध्यक्ष, भारतीय इतिहास कांग्रेस (समकालिक 2008) हैं।
प्रकाशन : रिपोर्टिंग द पार्टिशन ऑफ
पंजाब : प्रेस, पब्लिक ऐंड अदर ओपिनियन 1947। इस अध्ययन की समीक्षा अनेक विद्वानों द्वारा भारत, यू.के., यू.एस.ए. तथा कनाडा के विभिन्न महत्त्वपूर्ण जर्नलों के लिए की गई। उनकी पुस्तक ‘पॉलिटिक्स ऑफ शेयरिंग पावर : द पंजाब यूनियनिस्ट पार्टी 1923-1947’ को विभाजन के पूर्व पंजाब में विद्यमान राजनैतिक व्यवस्था पर एक महत्त्वपूर्ण एवं सर्वस्वीकार्य शोध के रूप में मान्यता दी जाती है। फ्रैंकली स्पीकिंग : ऐसे ऐंड ओपिनियंस, 1990 के दशक में प्रमुख राष्ट्रीय समाचार-पत्रों में प्रकाशित उनके लेखों एवं विचारों का संकलन है। उनके निरीक्षण में 14 शोधार्थी
पी-एच.डी. कर चुके हैं। ‘द एसेसिनेशन ऑफ महात्मा गांधी ऐंड द पॉलिटिक्स ऑफ बैनिंग द राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ नामक पुस्तक का प्रकाशन अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली द्वारा 2015 में किया गया। ‘द कश्मीर डिस्प्यूट 1947-48 : ए स्टडी ऑफ अरली कंटेम्पैररी व्यूज ऐंड रिएक्शन’ का कार्य पूर्ण।
प्रो. तंवर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता शैक्षणिक, अधिष्ठाता सामाजिक विज्ञान संकाय एवं कुलसचिव के पदों पर आसीन रहे हैं। उनका विश्वविद्यालय का शैक्षणिक अनुभव लगभग 38 वर्षों का है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में प्रोफेसर एमिरेटस के पद पर कार्यरत हैं।