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"वफादारी, ईमानदारी और जिम्मेदारी' ये सिर्फ शब्द नहीं, इनमें इनके अर्थ से कहीं अधिक गहराई है।
ये गुण क्या हैं?
क्या ये किसी लीडर में जन्मजात होते हैं या समय और अनुभव के साथ इनमें निखार आता है?
और फिर, एक सच्चा लीडर कौन होता है?
कॉर्पोरेट बोर्डरूम में, इस अवधारणा 'नेतृत्व' चाहे रणभूमि में हो या पर केंद्रित यह पुस्तक इन गुणों की एक झलक देती है, जिनके कारण एक साधारण व्यक्ति विभिन्न रूपों में आने वाली प्रतिकूल परिस्थितियों का मुकाबला कर उन पर विजय प्राप्त करने योग्य बनता है। युद्ध और आतंकवाद के माहौल में सेना के वास्तविक जीवन की सच्ची कहानियों से सजी यह पुस्तक मुख्य रूप से विभिन्न स्थितियों में सजग और विवेकपूर्ण प्रतिक्रिया पर केंद्रित है। यह दिखाती है कि गंभीर हालात में, चाहे सेना में हों या पेशेवर जीवन में, जब व्यक्ति अपनी प्रशिक्षण-प्राप्त समझ को सूझ-बूझ और चतुराई से जोड़ता है, तो वह बाधाओं पर विजय पाकर सच्चा लीडर बन सकता है।
'वफादारी, ईमानदारी और जिम्मेदारी : वॉररूम से बोर्डरूम तक' एक प्रेरणादायक, प्रामाणिक और अत्यंत आकर्षक पुस्तक है, जो जीवन की चुनौतियों का सामना करने, अपने काम में सफलता पाने या दैनिक जीवन की कठिनाइयों को दूर करने की इच्छा रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अवश्य पढ़नी चाहिए।"