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Vedkaleen Bharat Ki Adhyatmik Nayikayen   

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Author Dr. Aprajita Mishra
Features
  • ISBN : 9789347273049
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Dr. Aprajita Mishra
  • 9789347273049
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 184
  • Soft Cover
  • 200 Grams

Description

"""ऋचाएँ मौन नहीं हैं-वे स्त्री के स्वर में अनहद बोलती हैं।"" ऋग्वेद केवल देवस्तुतियों का संग्रह नहीं अपितु भारतीय चेतना का 'आत्म-नाद' और आदिस्रोत है। इस महान् ग्रंथ में स्त्री केवल श्रद्धा या प्रेरणा का पात्र नहीं, बल्कि स्वयं सृजन की अधिष्ठात्री है। प्रस्तुत पुस्तक ऋग्वेद की उन पंद्रह प्रमुख ऋषिकाओं/देवियों-लोपामुद्रा, घोषा, अपाला, विश्ववारा, सरस्वती, अदिति आदि को केंद्र में रखती है, जिनकी ऋचाएँ आज भी उतनी ही जीवंत और प्रासंगिक हैं, जितनी सहस्राब्दियों पूर्व थीं।

इस पुस्तक का उद्देश्य मात्र ऐतिहासिक पुनर्पाठ नहीं, वरन् स्त्री की उस वैदिक चेतना को पुनर्जीवित करना है, जो आधुनिक विमर्शों से परे आदिकाल से ही प्रतिष्ठित रही है। प्रत्येक अध्याय में ऋषिका का परिचय, उनकी ऋचा का मूल संस्कृत पाठ, हिंदी भावानुवाद और समसामयिक संदर्भों में उनकी सूक्ष्म व्याख्या सम्मिलित है।

डॉ. अपराजिता मिश्रा ने महर्षि दयानंद सरस्वती और सायणाचार्य जैसे मनीषियों के भाष्यों का गहन अध्ययन कर ऋषिकाओं के व्यक्तित्व को उनके मूल आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया है। यह ग्रंथ उस 'ऐतिहासिक विस्मृति' का अंत है, जो हजारों वर्षों से मौन थी। यहाँ स्त्री की वेदना भी है, उसकी स्वतंत्र वाणी भी, और सबसे बढ़कर उसका प्रखर आत्मबोध भी। शोध और संवेदना के अनूठे संगम के साथ यह पुस्तक पाठकों को वेद के भीतर नारी स्वर को एक नए और गौरवशाली दृष्टिकोण से सुनने के लिए आमंत्रित करती है।"

The Author

Dr. Aprajita Mishra

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