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Rani Durgavati: Garha State (Jabalpur) of Madhya Pradesh Epic Story of The Fearless Queen Who Defied the Mughals Hindi Edition   

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Author Dr. Rekha Nagar , Dr. Madan Singh Waskel
Features
  • ISBN : 9789355621702
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Dr. Rekha Nagar , Dr. Madan Singh Waskel
  • 9789355621702
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2025
  • 88
  • Soft Cover
  • 150 Grams

Description

भारत का इतिहास महान् योद्धाओं, शूरवीरों और क्रांतिकारियों की वीरता और उपलब्धियों के लिए जाना जाता है, जिनके नाम इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज है, उनमें वीर पुरषों के साथ कई वीरांगनाओं के नाम भी सम्मिलित हैं। एक कुशल योद्धा के रूप में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, कित्तूर की रानी चेन्नम्मा, रामगढ़ की रानी अवंतीबाई, मालवा की रानी अहिल्याबाई होल्कर आदि।

ऐसी ही प्रतिभाशाली और महान् वीरांगना के रूप में प्रसिद्ध एक गोंडरानी थी, जिनका नाम था दुर्गावती। वही रानी दुर्गावती, जो अपने समय की सबसे बहादुर, साहसी और अद्भुत व्यक्तित्व की धनी थी, जिसने अपने जीवन में कभी पराजय का मुँह नहीं देखा, जिसने किसी भी परिस्थिति में दुश्मन के सामने न तो कभी संधि की और न ही समर्पण। एक ऐसी वीर रानी, जो अपने सतीत्व और मातृभूमि की रक्षा के लिए अंतिम क्षण तक लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गई।

रानी दुर्गावती को मुगल साम्राज्य के खिलाफ अपने अस्तित्व और अपने राज्य की रक्षा के लिए याद किया जाता है। उनका व्यक्तित्व बहुमुखी प्रतिभा का धनी था। वह अनुपम सुंदर और बहादुर थी, प्रशासनिक कौशल को बारीकी से जानने वाली और एक महान् नेता थी। एक ओर जहाँ अपने राज्य की जनता के लिए वह ममतामयी माँ, पालक और संरक्षक थी। वहीं आततायी दुश्मनों के लिए साक्षात् रणचंडी थी। रानी का व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों ही असाधारण था।

दुर्गावती का जीवनवृत्त सुना, समझा और पढ़ा जा रहा है। देशाभिमानी, न, साहसी क्षत्राणी और विदुषी रानी दुर्गावती का प्रामाणिक जीवन-चरित है यह उपन्यास।.

The Author

Dr. Rekha Nagar

डॉ. रेखा नागर—सहायक प्राध्यापक (हिंदी), भेरुलाल पाटीदार शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय महू, जिला इंदौर (मध्य प्रदेश)।

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से पी-एच. डी. की उपाधि प्राप्त । एम. फिल. के शोध-ग्रंथ का विषय - ' भील एवं भिलाला जनजाति के लोकगीतों का तुलनात्मक अध्ययन' (बड़वानी के संदर्भ में) तथा पी-एच.डी. के शोध-ग्रंथ का विषय -'आंचलिक कहानी - आस्वाद के विविध आयाम ।'

भिलाला जनजाति की लोक-संस्कृति व लोकगीतों का संकलन। इस विषय पर दो शोध-पत्रों का प्रकाशन तथा जनजाति देवलोक, पूजा-पद्धति, सामाजिक व्यवस्था, संत परंपरा आदि विषयों पर शोध-पत्रों का प्रकाशन।

सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में विभिन्न संगठनों में सक्रिय । वर्तमान में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम की केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य।

Dr. Madan Singh Waskel

डॉ. मदन सिंह वास्केल—सहायक प्रोफेसर (प्राणीशास्त्र) भेरूलाल पाटीदार शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय महू।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर। की उपाधि प्राप्त की।
शोध विषय - 'रेशमकीट की वृद्धि और रेशम की उत्पादकता पर पेरिटोल का प्रभाव।
अनेक शोधालेख प्रकाशित । स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के अंतर्गत जनजाति नायकों के योगदान पर व्याख्यान।

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