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"श्री राम नाथ ठाकुर जनप्रिय राजनेता और समाजधर्मी, ओजस्वी वक्ता, चिंतक एवं कर्मठ लोकसेवक हैं। अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने समाज के उपेक्षित वंचित वर्ग के संघर्ष और पीड़ा को बड़ी नजदीकी से अनुभव किया। इन उपेक्षितों के जीवन-स्तर को ऊँचा उठाने के लिए सदैव कार्य करते रहे। भले वह विधान परिषद् का मंच हो या संसद् का, उनके कार्यों के केंद्र में सदैव वे लोग रहे, जो दशकों से सामान्य जरूरी सुविधाओं से भी वंचित रहे। श्री राम नाथ ठाकुर उन लोगों की आवाज बने, उनके अधिकारों के लिए लड़े और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने के माध्यम बने।
प्रस्तुत पुस्तक ऐसे अनूठे व्यक्तित्व की संसद् में जनहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता एवं वंचितों के अधिकारों के लिए किए गए प्रयासों का प्रामाणिक दस्तावेज है।"