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"रीता वैंबली हाई स्ट्रीट पर बेमतलब टहल रही थी, रोज की आदत जो ठहरी। सुबह के नौ बजे नहीं कि रवीश अपने कंप्यूटर पर जा बैठता है; इस वक्त वह टीवी नहीं देख सकती; रसोई में एक बरतन तक नहीं खड़कना चाहिए।
ऐसे में वह और क्या करे? घर में बैठी उकता जाती है। उसकी एकमात्र सखी सुलेखा का पति धर्मेंद्र भी सुबह-सुबह बहुत व्यस्त रहता है। साढ़े नौ बजे सुलेखा के घंटी दबाने से पूर्व ही रीता अपने घर से बाहर आ जाती है और दोनों निकल पड़ती हैं किसी भी दिशा में
-पुस्तक से"