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"मोनिका शर्मा बताती हैं कि कैसे हम अपनी आंतरिक क्षमताओं और आत्मज्ञान का स्रोत बनाकर बदलाव प्रकट कर सकते हैं, जो गरिमा, करुणा, न्यायसंगत और साहस जैसे सार्वभौमिक आंतरिक मूल्यों को आत्मरूपित करता है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य जगहों पर बीस साल से अधिक के कार्यानुभव के आधार पर उन्होंने रूपांतरकारी नेतृत्व पर एक नई मौलिक विधि प्रस्तुत की, जो बदलाव की प्रणालियों का निर्माण करती है, जहाँ हर कोई शामिल हो सकता है- न कि केवल विश्लेषक और नीति निर्माता।
मोनिका प्रदर्शित करती हैं कि हम सभी एक नई मानवता के वास्तुकार हो सकते हैं। मोनिका नीति-निर्माण, योजना और कार्यान्वयन को सरल बनाती हैं, ताकि प्रत्येक व्यक्ति दुनिया की सबसे कठिन समस्याओं को खत्म करने में एक सूचित और कार्यनीतिपूर्ण भूमिका निभा सकें।
दुनिया भर से वास्तविक जीवन के उदाहरणों का उपयोग करते हुए वह दिखाती हैं कि कैसे सार्वभौमिक करुणा, समता का आवेग और मानवीय क्षमता की हमारी स्वाभाविक विशेषताएँ-नए पैटर्न बना सकती है, जो घोर असमानता, बेलगाम नफरत, 'सामाजिक पहचान पर आधारित संघर्ष' और 'कभी न खत्म होने वाली लालच की मानसिकता' जैसी प्रमुख चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करती हैं। सीधी, सुलभ शैली में लिखी गई 'मौलिक रूपांतरकारी नेतृत्व' एक पथ-प्रदर्शक प्रतिमान बदलाव की रूपरेखा तैयार करती है, जो दुनिया भर में समतापूर्ण और टिकाऊ नतीजे उत्पन्न कर रही है।"