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"यह उपन्यास संघर्ष, संकल्प और सपनों की उस अदृश्य यात्रा का साहित्यिक चित्र है, जिसमें जीवन की कठिन परिस्थितियाँ मनुष्य को तोड़ती हैं और गढ़ती भी हैं। यह कथा उन युवाओं की आत्मकथा-सदृश्य अनुभूति है, जो सीमित साधनों, आर्थिक बाधाओं और अनगिनत असफलताओं के बावजूद अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहते हैं। तंग कमरों की उदास दीवारें, देर रात तक जलती मद्धिम रोशनी, प्रश्नपत्रों के ढेर और हर नए प्रयास से पहले उठते संशय-इन सबके बीच भी जो मनुष्य निरंतर आगे बढ़ने का साहस जुटाता है, वही अंततः सफलता का अर्थ समझता है।
इस कृति में सफलता को अंकों, पदों या बाहरी चमक-दमक से नहीं आँका गया है, बल्कि उसे उन क्षणों में खोजा गया है, जब एक गिरता हुआ मन पुनः उठना सीखता है, जब इच्छाशक्ति थकान पर विजय पाती है और जब टूटन ही नई उड़ान का आधार बनती है। यह उपन्यास पाठक को भीतर तक स्पर्श करता है, क्योंकि हर व्यक्ति के जीवन में कुछ सपने अधूरे रहते हैं, कुछ प्रतिज्ञाएँ समय से हार जाती हैं, परंतु आशा का दीपक कभी पूर्णतः नहीं बुझता। यह कृति उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो संघर्षों से गुजरते हुए भी अपने विश्वास की लौ को जलाए रखते हैं, क्योंकि वही आकाश को छूते हैं, जो हार के बाद भी प्रयास करना नहीं छोड़ते।"