₹250
"मैं तुम तक नहीं उड़ पाती। और यह हरियाली और नमी परत-दर-परत तुम्हारी याद की मिट्टी बन जाते हैं। तुम लहलहाती हो...! और भी लहलहाती हो बर दर बरस ।"