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एक जीवन में व्यक्ति न जाने कितने पड़ावों से गुजरता है, कितने रिश्तों को जीता है, कितने ए संबंधों को बनते-बिखरते देखता है, कितनी चुनौतियों का सामना करता है और जीवन के कितने ही अनदेखे-अनजाने आयामों से रू-ब-रू होता है। हर पड़ाव अपने साथ एक नया अनुभव, हर रिश्ता एक नई संवेदना, हर चुनौती एक नया सबक और हर अनुभव जीवन को देखने की एक नई दृष्टि लेकर आता है। जीवन-यात्रा के इन तमाम अनुभवों, अनुभूतियों और रिश्तों को यह पुस्तक इस प्रकार चित्रित करती है कि ये आपको अपनी कहानी, अपने अनुभव और अपने रिश्ते लगने लगें।
माँ, पिता, बहन, बेटी, प्रकृति, प्रेम या देश, हर रिश्ते के मर्म को रेखांकित करती हुई कई भावपूर्ण रचनाएँ आपके हृदय की गहराइयों में निश्चय ही उतर जाएँगी। और कई कविताएँ आशाओं के दीप जलाती हुई आपको यह महसूस कराएँगी कि तिमिर पर प्रकाश की सदैव जीत होगी। आपको लगेगा कि जीवन की अनेक विषमताओं के बीच भी यह जीवन जीने योग्य है।
फ़िलहाल पुस्तक आपसे कह रही है कि 'काश ! मुझे तुम पढ़ लेते' । पढ़ कर देखिए।