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Rana Sanga | Mewar History Rajput Bravery Warrior Tales Book In Hindi   

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Author Manu Sharma
Features
  • ISBN : 9788117464274
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Manu Sharma
  • 9788117464274
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 224
  • Hard Cover
  • 250 Grams

Description

"महाराणा सांगा ने बोलना आरंभ किया, ""मेरे वीर मित्रो, इतना विशाल साम्राज्य आपके ही बल पर बना है। आज फिर संकट के बादल मेवाड़ के भाग्य पर छाने वाले हैं। आप लोगों की तलवार के पानी से ही मेवाड़ के पानी की रक्षा हो सकती है। पहले भी एक नहीं, अनेक होलियाँ आई हैं और हम सबके जीवन में कदाचित् और भी होलियाँ आएँगी। इन सब होलियों से भी बड़ी होली राजपूतों के जीवन में नित्य आती है। इस होली में हम अबीर और रंग से होली खेलते हैं; वह होली रक्त की होती है। इसमें फाग गाया जाता है। यही होली राजपूतों की सबसे प्रिय होली है। वे खून से खुलकर खेलना पसंद करते हैं। एक ऐसी ही होली हम सबके जीवन में आने वाली है। हम उस होली के लिए आपका सहर्ष आमंत्रण करते हैं। क्या आप तैयार हैं ?""

सलहदी के चले जाने के बाद एक बार राजपूत सेना में थोड़ी खलबली मची। महाराणा ने बड़े जोर से ललकारा, ""वीरो, दुनिया क्या कर रही है, इसे मत देखना। अपना काम करो, रणचंडी का खप्पर भरो। देखो, लाल-लाल जिह्वा तुम्हारा बलिदान चाहती है। आगे बढ़ो, मारने के लिए मरो। तुम्हारी मौत तुम्हारे काम आएगी, मेवाड़ के काम आएगी, मेवाड़ के इतिहास के काम आएगी।"" महाराणा सांगा की जय ! बप्पारावल के पवित्र सिंहासन की जय ! जय रणचंडिके ! चामुंडे ! जय महाकाली ! के नारों से आकाश गूंज उठा।

- इसी पुस्तक से

मेवाड़ की आन-बान-शान के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर देने वाले पराक्रम, पौरुष और वीरता के पर्याय राणा सांगा पर प्रामाणिक कृति, जो हर पाठक के मन को उनकी शूरवीरता और अदम्य साहस के रंग में रँग देगी।"

The Author

Manu Sharma

मनु शर्मा ने साहित्य की हर विधा में लिखा है। उनके समृद्ध रचना-संसार में आठ खंडों में प्रकाशित ‘कृष्ण की आत्मकथा’ भारतीय भाषाओं का विशालतम उपन्यास है। ललित निबंधों में वे अपनी सीमाओं का अतिक्रमण करते हैं तो उनकी कविताएँ अपने समय का दस्तावेज हैं। जन्म : सन् 1928 की शरत् पूर्णिमा को अकबरपुर, फैजाबाद में। शिक्षा : काशी विश्‍वविद्यालय, वाराणसी।
किताबें : ‘तीन प्रश्‍न’, ‘राणा साँगा’, ‘छत्रपति’, ‘एकलिंग का दीवान’ ऐतिहासिक उपन्यास; ‘मरीचिका’, ‘विवशता’, ‘लक्ष्मणरेखा’, ‘गांधी लौटे’ सामाजिक उपन्यास तथा ‘द्रौपदी की आत्मकथा’, ‘द्रोण की आत्मकथा’, ‘कर्ण की आत्मकथा’, ‘कृष्ण की आत्मकथा’, ‘गांधारी की आत्मकथा’ और ‘अभिशप्‍त कथा’ पौराणिक उपन्यास हैं। ‘पोस्टर उखड़ गया’, ‘मुंशी नवनीतलाल’, ‘महात्मा’, ‘दीक्षा’ कहानी-संग्रह हैं। ‘खूँटी पर टँगा वसंत’ कविता-संग्रह है, ‘उस पार का सूरज’ निबंध-संग्रह है।
सम्मान और अलंकरण : गोरखपुर विश्‍व-विद्यालय से डी.लिट. की मानद उपाधि। उ.प्र. हिंदी संस्थान का ‘लोहिया साहित्य सम्मान’, केंद्रीय हिंदी संस्थान का ‘सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार’, उ.प्र. सरकार का सर्वोच्च सम्मान ‘यश भारती’ एवं साहित्य के लिए म.प्र. सरकार का सर्वोच्च ‘मैथिलीशरण गुप्‍त सम्मान’।
संपर्क : 382, बड़ी पियरी, वाराणसी।

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