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"यह पुस्तक केवल बाह्य यात्रा का वर्णन नहीं, बल्कि लेखिका के लिए हुए सत्य का प्रतिबिंब है। इन पृष्ठों के माध्यम से, यह पाठकों को एक ऐसी अंतर्यात्रा पर चलने का निमंत्रण देती हैं, जहाँ संसार का कोलाहल शांत हो जाता है और हृदय में आत्म-साक्षात्कार की दिव्य ज्योति जल उठती है।
उनकी आध्यात्मिक यात्रा उन्हें स्वाभाविक रूप से कैलाश की उन रहस्यमयी और दिव्य ऊँचाइयों की ओर ले गई, जहाँ भगवान महादेव जी का वास है। वह नियमित रूप से कैलाश मानसरोवर के दर्शन व गहन तपस्या हेतु जाती रहती हैं। वहाँ के एकांत में उन्होंने न केवल स्वयं को ना केवल ध्यान की गहराइयों में उतारा, बल्कि अनेक जिज्ञासु साधकों के लिए भी साधना के पावन द्वार खोले। उनकी यह कृति, 'कैलाश- परम चेतना का ऊर्जा केंद्र', उनके इन्हीं पवित्र अनुभवों और आध्यात्मिक अनुभूतियों का एक कोमल निचोड़ है।"