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"रात घनी और भारी चादर की तरह कमरे पर छा गई थी, चारों ओर एक खामोशी और अजीब-सा सन्नाटा फैला हुआ था। रजनीश की विशाल हवेली के बाहर हवा ने पुराने बरगद के पेड़ की शाखाओं को हिला दिया, उसकी पत्तियाँ रात में कुछ राज फुसफुसाने लगीं। रेडियो में विविध भारती पर एक पुराना हिंदी गीत धीमी आवाज में बज रहा था, जो कमरे में एक उदासीन माहौल भर रहा था। आज रात यह गीत एक अजीब सी विडंबना पैदा कर रहा था, जैसे आने वाले डर और अँधेरे का संकेत दे रहा हो।
'तू जहाँ-जहाँ चलेगा, मेरा साया साथ होगा""""!'
- इसी पुस्तक से
'झुमरी तलैया का रहस्य' सस्पेंस, मनोरंजक और ऐतिहासिक विधा पर लिखी कृति है। इसका रोमांच आपको इस कहानी से जोड़े रखेगा। बिनाका गीत माला के गीतों से रची-बसी इस कहानी में तथ्य हैं, रहस्य हैं और रहस्य को उजागर करने वाले जानवर भी। इस कहानी को पढ़कर आपको एक अलग रोमांच भाव मिलेगा।"