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JEEVAN KA SAAR

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Author Bhartendu Prakash Sinhal
Features
  • ISBN : 9789380823744
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 2012
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  • Bhartendu Prakash Sinhal
  • 9789380823744
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 2012
  • 2012
  • 200
  • Hard Cover
  • 400 Grams

Description

मनुष्य सृष्‍टि की सर्वोत्कृष्‍ट रचना इसीलिए माना गया क्योंकि इस देहधारी द्वारा अत्यंत सच्चाई और ईमानदारी से किए गए थोड़े से ही प्रयास से असीम उपलब्धि संभव है। दूसरे शब्दों में मनुष्य योनि ही एकमात्र वह माध्यम है, जिसका सीधा रिश्ता नितांत सुलभता से अपने रचयिता से संभव है।
मानव जीवन जीने की मौलिक कला का वास्तविक सार इसी रहस्य में निहित है। अतः माँभारत का कहना है—“ऐ वत्स, अत्यंत दुर्लभ अपने मानव तन की अमूल्यता को तू थोड़ा सा स्वयं विचार करके पहचान। चाहे तो पूर्णता का कोई मार्ग अपना ले, या फिर आत्मा से प्रेरित गुणों का सृजन निर्भीकता से अपने अंदर कर डाल। उसके उपरांत दोनों ही मार्गों पर केवल चल पड़ने की देर है और तू सहज में ही असीम पुरुषार्थ, असीम शक्‍तिवाला व्यक्‍तित्व धारण कर लेगा। परमानंद तेरे जीवन के प्रत्येक क्षण में स्वतः व्याप्‍त हो जाएगा। जीना किसे कहते हैं, इसका बोध तुझे अनायास हो जाएगा। जीने की कला का यही सबसे दिव्य रहस्य है। अब और विलंब करने की गुंजाइश नहीं रही।
—इसी पुस्तक से
इस पुस्तक में जीवन को संस्कारवान् बनाने और उसे सही दिशा में ले जाने के जिन सूत्रों की आवश्यकता है, उनका बहुत व्यावहारिक व‌िश्‍लेषण किया है। लेखक के व्यापक अनुभव से निःसृत इस पुस्तक के विचार मौलिक और आसानी से समझ में आनेवाले हैं।
जीवन को सफल व सार्थक बनाने की प्रैक्टिकल हैंडबुक है यह कृति।

The Author

Bhartendu Prakash Sinhal

स्वर्गीय रायबहादुर महाबीरसिंह सिंहल के सात पुत्रों में पाँचवें। बाल्यकाल में एक असाधारण स्काउट और सर्वांगीण सर्वोत्कृष्‍ट छात्र के नाते इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय में सन् 1954-55 सत्र के एकमात्र चांसलर्स पदक विजेता। यहीं से फिजिक्स में एम.एस-सी. और एल-एल.बी. की उपाधियाँ पाईं। सन् 1955 में आई.पी.एस. में चुने गए। उत्तर प्रदेश में नियुक्‍ति हुई। पुलिस अधीक्षक, आई.जी. पुलिस, प्रशिक्षण विद्यालय के प्रधानाचार्य जैसे पदों पर कार्य करते हुए भारत सरकार में अतिरिक्‍त गृह सचिव तथा महानिदेशक नागरिक सुरक्षा के महत्त्वपूर्ण पद से सेवा-निवृत्त हुए। अपने अनुकरणीय जीवन से असंख्य पुलिस अधिकारियों के आदर्श बने। दस्यु-उन्मूलन, अदम्य साहस, वीरता तथा सराहनीय सेवाओं के लिए राष्‍ट्रपति द्वारा सम्मानित। सेवा-निवृत्ति के बाद केंद्रीय फिल्म सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष नियुक्‍त हुए। वर्ष पर्यंत त्याग-पत्र देकर राजनीति में प्रवेश। राजनीति करने नहीं, राजनीति के क्षेत्र में चरित्रवान, प्रतिष्‍ठित लोगों के पुनरागमन को प्रेरित करने के लिए।
अपने सेवाकाल में दस हजार कॉलेज और यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों के अलावा आई.पी.एस., आई.ए.एस. तथा राज्यों की प्रशिक्षण संस्थाओं एवं विदेश में लेक्चर देते रहे हैं। इन वार्त्ताओं को सुनने पर श्रोता एक ऐसी दुनिया में पहुँच जाते हैं, जहाँ प्रकाश-ही-प्रकाश है।

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