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"यह पुस्तक उत्तर प्रदेश में जनमे और तमिलनाडु पुलिस अधिकारी के रूप में कार्यभार सँभालने वाले अधिकारी अनूप जायसवाल के युवावस्था के अनुभवों को कहानी की शैली में प्रस्तुत करती है। हृदय में दृढ़ता और ईमानदारी रखने वाला एक अधिकारी, कानून द्वारा दिए गए अधिकारों की सीमाओं के भीतर रहकर भी कितनी बड़ी उपलब्धियाँ हासिल कर सकता है- इन कथाओं में उसका जीवंत उदाहरण मिलता है।
यह पुस्तक इस बात का भी श्रेष्ठ प्रमाण है कि यदि सही दृष्टिकोण अपनाया जाए, तो गरीब और साधारण लोगों के जीवन की दिशा बदली जा सकती है, और जिन्हें कभी सुधारा नहीं जा सकता, ऐसा माना जाता है, उनमें भी सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
ये घटनाएँ पुलिस विभाग में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति की अंतरात्मा को झकझोर-कर जाग्रत् करने की शक्ति रखती हैं।"