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"धर्म-परिवर्तन का मतलब सिर्फ आस्था बदलना नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक पहचान और बाहरी प्रभावों के बीच अपनी विरासत को बचाए रखने के बारे में है। हमारे हिंदू युवाओं, जिनको उनके माता-पिता ने सिर्फ पढ़ने-लिखने को छोड़ दिया और धार्मिक कार्यों में शामिल नहीं किया, उनको सनातन धर्म का कोई ज्ञान नहीं मिल पाता और वे धर्मांतरण मशीनरी के लिए एक आसान शिकार होते हैं। एक बार कोई इन्हें किसी बहाने से चर्च ले जाए तो आगे चर्च के पास एक ऐसा सुनियोजित पाठ्यक्रम तैयार है, जो ऐसे बच्चों का ब्रेन वॉश करके ईसाइयत की डिग्री आसानी से दे देता है।
यदि हिंदू युवाओं के पास धर्म के ज्ञान की ऐसी ढाल होती तो धर्म के शिकारी इन्हें अपने जाल में नहीं फँसा पाते। हमारे देश के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी साजिश चल रही है। आचार्य चाणक्य ने कहा था कि किसी देश को पराजित या कमजोर करना हो तो सबसे पहले उसकी संस्कृति को कमजोर कर दो। अपनी संस्कृति से कटा हुआ व्यक्ति कभी देशहित के लिए मजबूती से खड़ा नहीं हो सकता। हमारी सनातन संस्कृति पर लगातार हो रहे इस आक्रमण से हमें बचाना होगा। धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर हो रहे इस खेल को रोकना होगा। सरकारों को इस विषय में अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना होगा। हालाँकि कुछ राज्यों में इस बारे में कुछ कानून पारित हुए हैं, किंतु वे भी स्पष्ट रूप से धर्मांतरण की इस क्रिया पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं