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डायरी के ये पृष्ठ बड़े अनमोल हैं। श्रीरामजी की कहानी, जो बिखरी पड़ी है, इनमें अपनी यात्राओं के मध्य, जहाँ जैसा योग-संयोग बना, जो तथ्य मिले, जो विचार आए, वे डायरी के पृष्ठों में उतरते गए, बिना किसी योजना के। श्रीराम के चरित्र के ये शब्दलेख इतने महत्त्वपूर्ण और शोधपरक होंगे, यह तो कभी विचारा ही न था। इन पृष्ठों में शोध के वे सूत्र अंकित हैं, जिन पर पृथक् पृथक् अनेक पुस्तकों को आकार दिया जा सकता है। जाने कितने स्थलों की खोज की जा सकती है और संस्कृति के कितने ही अध्यायों की पृष्ठभूमि तैयार की जा सकती है। डायरी के ये पृष्ठ अपनी कथा स्वयं कहने को आतुर हैं।