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"आख में एक-एक बूँद दवा डालनी है, पर आँख में दवा डालने का सही तरीका क्या होगा ? तेज बुखार में पानी से बदन पोंछना है, लेकिन यह कैसे किया जाएगा-पानी ठंडा, गरम, गुनगुना या सामान्य होगा? पट्टी पूरे शरीर पर की जाएगी या सिर और हथेलियों पर की जाएगी ? रोगी को मूत्र या मल की जाँच करानी है, पर सैंपल कैसे लेना है? बहुत छोटे बच्चों में तो यह पता ही नहीं होता कि वे कब मूत्रत्याग करेंगे, उनके मूत्र का सैंपल कैसे लिया जाएगा? गर्भनिरोधक गोलियों के पैकेट में से दो गोलियाँ खो गईं, अब क्या करें ? बच्चा आसानी से दवा नहीं खाता, क्या करें ? नेबुलाइजर लेने, इन्सुलिन का इंजेक्शन लगाने से लेकर आँख, नाक या कान में दवा डालने का, योनि या मलाशय में दवा पहुँचाने का सही तरीका क्या होता है, अधिकतर लोग न जानते हैं और न सामान्यतः उनका चिकित्सक बताता है।
सामान्य से लगने वाले ये तथ्य कभी-कभी चिकित्सा के परिणामों में भारी उलटफेर कर देते हैं। लेखक ने अपनी चार दशकों की सेवा-अवधि में अपने मरीजों द्वारा पूछे गए ऐसे प्रश्नों को इस पुस्तक में संकलित कर सरल और आम बोलचाल की भाषा में उनके उत्तर दिए हैं। यह पुस्तक हर परिवार में अवश्य होनी चाहिए।
स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने और स्वस्थ जीवन जीने के व्यावहारिक मंत्र बताती उपयोगी पुस्तक।"