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"भारत के हृदय में परंपरा और आध्यात्मिकता एक-दूसरे से सहज रूप से जुड़ी हुई हैं। कुछ सबसे आकर्षक और पूजनीय मंदिर हैं, जो हमारी आस्था व श्रद्धा का केंद्र हैं। देश के विशाल विस्तार में फैले ये मंदिर भक्ति, वास्तुशिल्प चमत्कार और भारत की गहरी जड़ें जमा चुकी सांस्कृतिक विरासत की कहानियाँ बताते हैं। प्रत्येक मंदिर के पास बताने के लिए एक कहानी है, सुलझाने के लिए एक किंवदंती है और एक आध्यात्मिक परिवेश है, जो आत्मा को मंत्रमुग्ध कर देता है। इस पुस्तक, 'देवालय दर्शन' में हम इन मंदिरों के पवित्र गलियारों के माध्यम से एक आकर्षक यात्रा शुरू करते हैं; उन रहस्यों, किंवदंतियों और ऐतिहासिक महत्त्व को उजागर करते हैं, जिनसे भारत की आस्था और संस्कृति की समृद्ध छवि के प्रतीक रेखांकित होते हैं।
प्राचीन परंपराओं के रहस्यों, मंदिरों की स्थापत्य कला, लाखों भक्तों को श्रद्धा एवं भक्ति के सूत्र में बाँधनेवाली अटूट आस्था से मंत्रमुग्ध होने के लिए तैयार हो जाइए। इस आध्यात्मिक यात्रा में सहयात्री बनकर इन रोचक कहानियों का आनंद लें, जो इन मंदिरों को सिर्फ पूजा स्थल नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत का भंडार बनाती हैं।"
ममता मेहरोत्रा
शिक्षा : एम.एस-सी. (प्राणी विज्ञान)।
कृतित्व : ‘अपना घर’, ‘सफर’, ‘धुआँ-धुआँ है जिंदगी’ (लघुकथा-संग्रह), ‘महिला अधिकार और मानव अधिकार’, ‘शिक्षा के साथ प्रयोग’, ‘विद्यार्थियों के लिए टाइम मैनेजमेंट’, ‘विश्वासघात तथा अन्य कहानियाँ’, ‘जयप्रकाश तुम लौट आओ’ तथा अंग्रेजी में ‘We Women’, ‘Gender Inequality in India’, ‘Crimes Against Women in India’, ‘Relationship & Other Stories’ & ‘School Time Jokes’ पुस्तकें प्रकाशित। RTE Act पर लिखी पुस्तक ‘शिक्षा का अधिकार’ काफी प्रसिद्ध हुई और अनेक राज्य सरकारों ने इस पुस्तक को क्रय किया है। उनकी पुस्तकें मैथिली में भी प्रकाशित हो चुकी हैं। कुछ संक्षिप्त डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का भी निर्माण किया है।
‘सामयिक परिवेश’ एवं ‘खबर पालिका’ पत्रिकाओं का संपादन। अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं से संबद्ध।
संप्रति : निशक्त बाल शिक्षा एवं महिला अधिकारों से संबंधित कार्यों में संलग्न।