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Delhi Dange : Sazish ka Khulasa   

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Author Ashish Kumar Anshu , Aditya Bhardwaj
Features
  • ISBN : 9789390378005
  • Language : Hindi
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More Information

  • Ashish Kumar Anshu , Aditya Bhardwaj
  • 9789390378005
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 2020
  • 120
  • Soft Cover

Description

सामने आ रहा है, दिल्ली दंगों का सच : धीरे-धीरे
‘अपनी योजना के तहत 24 फरवरी को हमने कई लोगों को बुलाया और उन्हें बताया कि कैसे पत्थर, पेट्रोल बम और एसिड बोतल फेंकने हैं। मैंने अपने परिवार को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया। 24 फरवरी, 2020 को दोपहर करीब 1.30 बजे हमने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया।’
आम आदमी पार्टी से निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के इस बयान को सुनकर वे लोग चौंक सकते हैं जो आम आदमी पार्टी के चरित्र से परीचित नहीं हो। आम आदमी पार्टी ने मसजिदों और मदरसों के अपने अच्छे नेटवर्क और ताहिर हुसैन अमानतुल्ला खान जैसे नेताओं के दम पर ही पूरी दिल्ली के एकएक मुसलमान का वोट हासिल कर लिया था। जिसके बदले में मानों उत्तरपूर्वी दिल्ली को आग में झोंक देने का लाइसेंस समुदाय विशेष को दे दिया था।
अब जब उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों पर चार्जशीट दिल्ली पुलिस तैयार कर चुकी है। उसके बाद 23 फरवरी को मौजपुर से भड़के हिंदू विरोधी दंगों को याद करते हुए, जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, गोकुलपुरी, करावल नगर, भजनपुरा, यमुना विहार में आग की तरह फैली उस हिंसा को सी.ए.ए. के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा से अलग करके देखना भूल होगी। शाहीन बाग, जामिया नगर, सीलमपुर में सी.ए.ए. के विरोध में फैलाई गई हिंसा, वास्तव में बड़े दंगे का पूर्वाभ्यास ही थी। जिस बड़े दंगे को उत्तरपूर्वी दिल्ली में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगमन पर 23-26 फरवरी, 2020 तक अंजाम दिया गया। 
इस हिंसा के लिए 4 फरवरी से ही कई घरों में कबाड़ी से शराब और कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतलें, पत्थर लेकर छत पर इकट्ठा करना शुरू कर दिया गया था। मुस्लिम समुदाय ने अपनी गाडि़यों में फुल पेट्रोल, डीजल भरकर रख लिया था ताकि बोतलों में पेट्रोल डीजल भरकर बम की तरह उसे वक्त आने पर इस्तेमाल किया जा सके।
मुस्लिम परिवारों में ऐसे परचे दंगों से पहले बाँट दिए गए जिसमें दंगों की स्थिति में हिंदूओं से निपटने की तरकीब लिखी गई थी। इन सारी बातों को देखने के बाद यह समझना कोई रॉकेट साइंस नहीं है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में होनेवाले दंगों के लिए यमुना पार का मुस्लिम समुदाय पहले से तैयार था। जबकि हिंदूओं को इससे सँभलने का बिलकुल मौका नहीं मिला।
अब धीरे-धीरे दिल्ली दंगों की साजिश का सच सामने आ रहा है, जिसकी वजह से वामपंथी इको सिस्टम का झूठ चल नहीं पा रहा।

 

The Author

Ashish Kumar Anshu
Aditya Bhardwaj

सुनील बाजपेयी ‘सरल’ का जन्म 22 फरवरी, 1968 को कल्लुआ मोती, लखीमपुर-खीरी (उ.प्र.) में उनके ननिहाल में हुआ था। उनका पैतृक स्थान रामखेड़ा है। बचपन के प्रारंभिक वर्ष अपने नाना स्व. श्री देवीसहाय मिश्र के सान्निध्य में बिताकर वे अपने माता-पिता (श्रीमती विमला बाजपेयी और श्री राम लखन बाजपेयी) के पास लखनऊ आ गए, जहाँ स्कूली शिक्षा पूरी हुई। आई.आई.टी. कानपुर से बी.टेक. और आई.आई.टी. दिल्ली से एम.टेक. की शिक्षा पूरी कर सन् 1991 में भारतीय राजस्व सेवा (आई.आर.एस.) ज्वॉइन की। नौकरी के दौरान आई.आई.एम. लखनऊ से प्रबंधन में परास्नातक डिप्लोमा प्राप्त किया और मेरठ विश्वविद्यालय से एल.एल.बी. की डिग्री अर्जित की। संप्रति आयकर आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं।

उन्हें साहित्य और अध्यात्म से विशेष रुचि रही है। सन् 2014 में श्रीमद्भगवद्गीता का काव्यानुवाद कर ‘गीता ज्ञानसागर’ लिखी और तबसे व्याख्यानों के द्वारा गीता के ज्ञान का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। द्वितीय पुस्तक ‘नई मधुशाला’ श्री हरिवंश राय ‘बच्चन’ की ‘मधुशाला’ से प्रेरित है और उसी तर्ज पर दार्शनिक विचारों को अभिव्यंजित करती है। प्रस्तुत कृति इनकी तृतीय पुस्तक है।

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