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"प्रस्तुत पुस्तक में नामचीन लेखकों की निबंधावली शैली में रचनाओं को एकत्र करने के पीछे एक ही सोच थी कि आज के दशक में निबंध की शैली वस्तुतः कम होती जा रही है। गद्य में इस विद्या का ह्रास हो रहा है। पुरजोर तरीके से इसे पुनः पुनर्जीवित करने की दिशा में सार्थक प्रयास होना चाहिए। सामयिक परिवेश संस्था, जो विगत बीस वर्षों से इस दिशा में गंभीरता से कार्यरत है, इसी का परिणाम है कि लगातार वह हर वर्ष साहित्य-सृजन में अपना विशेष स्थान बनाए हुए है।
विगत वर्षों में संस्था के द्वारा अनेकानेक जनोपयोगी साहित्य का सृजन किया गया है और गद्य एवं पद्य विधाओं में अपने विशेष हस्ताक्षर स्थापित कर चुकी है।
पद्म में गजल एवं गीत में देश-विदेश के साहित्यकारों के साझा संकलन के संपादन का निष्पादन हो चुका है। इस विधा में स्थान बना चुकी पुस्तकों में कुछेक विशेष चर्चित रही हैं।
साल-दर-साल अपनी गुणवत्ता एवं मेहनत से संस्था नवांकुर साहित्यकारों को आगे भी मंच प्रदान करेगी।"
ममता मेहरोत्रा
शिक्षा : एम.एस-सी. (प्राणी विज्ञान)।
कृतित्व : ‘अपना घर’, ‘सफर’, ‘धुआँ-धुआँ है जिंदगी’ (लघुकथा-संग्रह), ‘महिला अधिकार और मानव अधिकार’, ‘शिक्षा के साथ प्रयोग’, ‘विद्यार्थियों के लिए टाइम मैनेजमेंट’, ‘विश्वासघात तथा अन्य कहानियाँ’, ‘जयप्रकाश तुम लौट आओ’ तथा अंग्रेजी में ‘We Women’, ‘Gender Inequality in India’, ‘Crimes Against Women in India’, ‘Relationship & Other Stories’ & ‘School Time Jokes’ पुस्तकें प्रकाशित। RTE Act पर लिखी पुस्तक ‘शिक्षा का अधिकार’ काफी प्रसिद्ध हुई और अनेक राज्य सरकारों ने इस पुस्तक को क्रय किया है। उनकी पुस्तकें मैथिली में भी प्रकाशित हो चुकी हैं। कुछ संक्षिप्त डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का भी निर्माण किया है।
‘सामयिक परिवेश’ एवं ‘खबर पालिका’ पत्रिकाओं का संपादन। अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं से संबद्ध।
संप्रति : निशक्त बाल शिक्षा एवं महिला अधिकारों से संबंधित कार्यों में संलग्न।