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"यह पुस्तक श्री चाँद मिश्रा की जीवनयात्रा का वृत्तांत है। बचपन में मिले शिक्षा-संस्कार और आध्यात्मिकता के बल पर उन्होंने मुंबई फिल्म उद्योग में किस प्रकार संघर्ष पर विजय पाते हुए न केवल सफलताएँ अर्जित कीं, बल्कि फिल्म उद्योग के नामी सितारों के बिजनेस मैनेजर बनकर उन्होंने उनका कार्य सँभाला और फिल्म उद्योग में उन्हें भी एक ऊँचाई तक पहुँचाया।
यह पुस्तक इस सच्चाई को भी बयाँ करती है कि फिल्म उद्योग में काम करने वाले बड़े-बड़े सितारे, जिनके बारे में हम पता नहीं क्या कुछ सोचते रहते हैं, वह भी अपने साथ काम करने वालों के साथ कितना प्रगाढ़ रिश्ता रखते हैं, कितना एक-दूसरे का खयाल रखते हैं, किस कदर एक-दूसरे के दुःख-सुख में काम आते हैं। श्री चाँद मिश्रा ने अध्यात्म के रास्ते पर चलते हुए ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़कर संपूर्ण सेवाभाव से मानव जाति हेतु समाज-सेवा के तमाम कार्य किए।
यह पुस्तक हमें यह भी बताती है कि तमाम सफलता के बाद भी इनसान को सुकून और शांति अध्यात्म और ईश्वर से ही प्राप्त हो सकती है। यह पुस्तक हमें जीवन-संघर्ष में सफल होने और अध्यात्म तथा ईश्वर के द्वारा संपूर्णता की ओर अग्रसर होने की राह दिखाती है और प्रेरित करती है।"