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"यहाँ मैं बताना चाहता हूँ कि कैसे नरेन्द्र मोदी ने अपने पूर्ववर्ती महान् राष्ट्रनायकों के विचारों को क्रियान्वित किया।
आज हम देख रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शासन केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि विचारपरिवर्तन का द्योतक हैवह विचार, जिसे हमारे महापुरुषों ने अपनी परिकल्पनाओं में बहुत पहले जगाया था तथा हमने भी उन संकल्पों की पूर्ति के सपने सँजोए थे।
मेरा उद्देश्य मात्र मोदी सरकार की योजनाओं का ब्योरा देना नहीं है, बल्कि यह दिखाना है कि इन योजनाओं की जड़ें उन विचारों में हैं, उन संकल्पों में हैं, जो हमारे राष्ट्रपुरुषों ने दशकों पहले सोचे थे।
नरेन्द्र मोदी एवं चंद्रगुप्त मौर्य ने अपनी यशकीर्ति की गाथा स्वयं लिखी है। दोनों के जीवन की कहानी संघर्ष और समर्पण की एक प्रेरणादायक गाथा है। दोनों ही अपनी असाधारण प्रतिभा के बल पर अभ्युदय के शिखर तक पहुँचे हैं।
मोदी ने भारतमाता की प्रतिज्ञा 'महामंगले पुण्यभूमे त्वदर्थे पतत्वेष कायो हे पुण्यभूमि, मेरा यह शरीर तेरे लिए समर्पित है' को जीवन में निभाया।
जब भी इतिहास इस कालखंड का अवलोकन करेगा तो अवश्य ही नरेन्द्र मोदी को 'सेतुपुरुष' के रूप में पाएगा। मोदी ने अतीत के स्वप्नों एवं वर्तमान की आकांक्षाओं के मध्य एक सेतु बनाया है।
इसी पुस्तक से"