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"त्याग-तपस्या की प्रतिमूर्ति, स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता राजेंद्र बाबू ने देश के नवजागरण और नवनिर्माण में जो अमूल्य सेवाएँ प्रस्तुत कीं, वे कभी भुलाई नहीं जा सकतीं; आधुनिक भारत के निर्माताओं में उनका स्थान सदा अन्यतम बना रहेगा।
उनकी योग्यता एवं सेवापरायणता के कायल देशवासियों ने उन्हें शीर्ष पदों पर प्रतिष्ठित किया, एक से बढ़कर एक जिम्मेदारियाँ उन्हें सौंपी गईं, और उन सब को - चाहे वह गांधीजी के नेतृत्व में चल रहा नीलहे गोरों द्वारा सताए चंपारण के पीड़ित किसानों का सेवाकार्य हो या सर्वस्व न्योछावर कर स्वतंत्रता सेनानी के कंटकाकीर्ण मार्ग का अनुसरण; कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में अपूर्व संगठन शक्ति का परिचय या अंतरिम सरकार में खाद्य एवं कृषि मंत्री के दायित्वों का कुशल निर्वहन; संविधान-सभा अध्यक्ष की हैसियत से संविधान निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान या भारतीय गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति के पद से बारह वर्षों तक लगातार देश का योग्य मार्गदर्शन- जो भी कार्य उन्हें सौंपे गए, उन सबको उन्होंने पूरे कर्तव्यबोध के साथ निभाया।
संविधान-सभा अध्यक्ष के रूप में उनके द्वारा किया गया अद्वितीय कार्य तो विशेष रूप से स्मरणीय है। संविधान-निर्माण की कहानी आधुनिक भारत के इतिहास का एक गौरवमय अध्याय है; सही तथ्यों सहित यथावत् इसे नई पीढ़ी तक पहुँचाना हम सबका कर्तव्य बनता है। प्रस्तुत पुस्तक का यही प्रयोजन है।"