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कुछ प्रश्न ऐसे होते हैं जिनका हल खोजना बहुत कठिन होता है । इन प्रश्नों में बहुत सारी तकनीकों का प्रयोग कर इन्हें हल करने का मार्ग खोजना पड़ता है । इसके लिए बुद्धि-चातुर्य की आवश्यकता होती है ।
सीधे-सीधे किसी फॉर्मूले में फिट करके इनके हल ज्ञात नहीं किए जा सकते । इनके हल प्राप्त करने के लिए युक्तियाँ ही काम आती हैं । यथा संख्या 10000001 किस संख्या से विभाजित होगी? यहाँ 10000001 को विभाजित करनेवाली संख्याओं को तलाश करने के लिए अनेक युक्तियों का प्रयोग करना पड़ेगा । यह एक लंबी प्रक्रिया है ।
हम कहें, ' चौवन, पचपन और छप्पन में सबसे बड़ी संख्या कौन सी है? ' तो यह एक सीधा-सादा प्रश्न है; परंतु यदि कहें, ' सतहत्तर, अठहत्तर और उनहत्तर में कौन सी संख्या सबसे बड़ी है? ' तब यह प्रश्न सीधा होते हुए भी अपने आप में थोड़ा पेचीदा है । इसी प्रकार छोटे-छोटे बच्चों, जो जोड़-घटाना सीख रहे होते हैं, से पूछा जाए कि एक रूमाल के चार कोनों में से एक कोना काट दिया जाए तो कितने कोने शेष बचेंगे? यह उनके लिए मनोरंजन की बात है ।
प्रस्तुत पुस्तक में सामान्य गणित के ' पहेली ' वर्ग में आनेवाले कुछ पेचीदे प्रश्नों का संकलन किया गया है, जो सामान्य व्यक्ति या गणित के विद्यालय स्तर के विद्यार्थियों के लिए मनोरंजन का साधन हो सकते हैं । ये प्रश्न पाठक के मन में गणित- अध्ययन के प्रति रुचि उत्पन्न करने के साथ-साथ उनका ज्ञानवर्धन भी करेंगे ।
वीरेंद्र कुमार का जन्म सन् 1948 ई. में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जनपद के रुस्तमपुर गौतना नामक ग्राम में हुआ। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही हुई। सन् 1958 ई. में ये अपने परिवार के साथ अलीगढ़ चले आए। इन्होंने सन् 1970 में आगरा विश्वविद्यालय से गणित विषय में एम.एस-सी. की डिग्री प्रथम श्रेणी के साथ प्राप्त की; सन् 1972 में आगरा विश्वविद्यालय से बी.एड. की डिग्री प्राप्त की। इन्होंने स्पेशल फंक्शंस के अंतर्गत कई शोध-पत्र प्रकाशित किए। सन् 1972 से लगातार 37 वर्ष इन्होंने मथुरा/हाथरस जनपद में इंटरमीडिएट के छात्रों को गणित विषय पढ़ाया। कुछ समय तक वे बुलंदशहर जनपद में प्रधानाचार्य पद पर भी रहे।
सन् 2009 में शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्ति प्राप्त कर स्वाध्याय तथा लेखन कार्य में अपना समय व्यतीत करते हैं। गणित के क्षेत्र में इन्होंने वैदिक अंकगणित, वैदिक बीजगणित, गणित की रोचक बातें, सामान्य गणित पेचीदे प्रश्न, गणित शिक्षण में उपयोगी पटचित्र, कंसेप्ट चार्ट्स इन मैथेमैटिक्स तथा आधुनिक भारत के दिवंगत गणितज्ञ नामक पुस्तकें लिखी हैं जो प्रकाशित होकर खूब लोकप्रिय हुई हैं। गणित के अतिरिक्त इन्होंने 'मीठा बोलें सुखी रहें' नामक व्यक्तित्व विकास की पुस्तक लिखी है। अनेक पुस्तकें प्रकाशित होने की प्रतीक्षा में हैं।