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'पराक्रम 1971' उन निर्भीक योद्धाओं की कहानी है, जिन्होंने बांग्ला-देश को स्वतंत्र कराने के लिए वीरतापूर्वक लड़ाई लड़ी और दक्षिण एशिया के मानचित्र को पुनः चित्रित किया। इसे आज भी समकालीन इतिहास में एक 'न्यायपूर्ण युद्ध' में सबसे निर्णायक सैन्य विजय माना जाता है।
युद्ध के चार परमवीर चक्र और छिहत्तर महावीर चक्र विजेताओं के सम्मान में तीनों सेनाओं के सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारियों तथा पत्रकारों द्वारा लिखी गई इस पुस्तक के निबंध पहली बार 'द ट्रिब्यून' में प्रकाशित हुए थे। श्रीनगर एयरफील्ड में 'फ्लाइंग बुलेट्स' के साथ ऊँची उड़ान भरने वाले फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों के कारनामों से लेकर ब्रिगेडियर आनंद सरूप की 'किलो फोर्स' द्वारा फौजदाहाट में युद्धबंदियों को पकड़ने तक यह पुस्तक सभी को सूचीबद्ध करती है। दिग्गजों, शीर्ष नौकरशाहों और पत्रकारों द्वारा किए गए विश्लेषण परिदृश्य को स्थापित करने और पाठकों को युद्ध को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं।