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कला-विचारक कलाओं को भिन्न-भिन्न अर्थों में, तो कभी भिन्न-भिन्न परिप्रेक्ष्य में देखने का प्रयास करते रहे हैं। इसका कारण यह है कि भारतीय कलाएँ मात्र मन के रंजन हेतु न होकर जीवन, अध्यात्म, दर्शन, कला, विचार, संकल्पना, परंपरा, भाषा, साहित्य, लोक जैसे तथ्यों से भी प्रभावित व पोषित होती रही हैं। इसी विचारधारा को ध्यान में रखते हुए 'नृत्य निबंधावली' पुस्तक के माध्यम से कथक नृत्य के विभिन्न पक्षों पर दृष्टिपात करने का प्रयास लेखिका द्वारा किया गया है। यह प्रयास निश्चित रूप से कथक नृत्य के विकास संबंधी विचारों को नई दिशा प्रदान करने हेतु सहायक सिद्ध होगा, ऐसी आशा है।