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"अपराजिता' केवल कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, अदम्य साहस और रिश्तों की अनकही परतों का एक जीवंत दस्तावेज है। अनेक पुरस्कारों से सम्मानित सुप्रसिद्ध लेखक संजीव जायसवाल 'संजय' की ये कहानियाँ पाठकों को जीवन के अलग-अलग रंगों से परिचित कराती हैं। इस संग्रह में जहाँ 'अपराजिता' और 'मिलन' जैसी कहानियाँ कला, साधना और प्रेम के द्वंद्व को एक नए धरातल पर परिभाषित करती हैं, वहीं 'शहीद' और 'गुनाह' सरहदों पर खड़े प्रहरी और आतंकवाद से जूझते आम इनसान के सर्वोच्च बलिदान को रोंगटे खड़े कर देने वाले अंदाज में बयाँ करती हैं।
कहानी 'कर्ज' विकास और विनाश के बीच पिसते आदिवासियों के संघर्ष, उनकी जड़ों से विस्थापन और अपनी मिट्टी की ओर लौटने की मर्मस्पर्शी पुकार को उजागर करती है। वहीं 'सोने का पिंजरा' और 'प्रतीक्षा' कॉरपोरेट दुनिया की चकाचौंध और पेशेवर अहंकार के पीछे छिपे खोखलेपन को उजागर करती हैं। हर कहानी अपने आप में एक यात्रा है। संघर्ष से विजय की, नफरत से प्रेम की और अंधकार से प्रकाश की। कहानियों की भाषा की रवानगी और कथानक का कसाव ऐसा है कि एक बार पढ़ना शुरू करने पर आप इसे पूरा किए बिना छोड़ नहीं पाएँगे। जीवन के नवरसों में डूबी यह पुस्तक हर संवेदनशील पाठक के संग्रह की शोभा बढ़ाने योग्य है।"