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"भगवान् राम की अनन्य भक्त माता शबरी का वंशज माना जानेवाला मुसहर समाज, जो आदिम जनजाति माना जाता रहा है, आज समाज में उपेक्षित और तिरस्कृत जीवन जी रहा है। आज इक्कीसवीं सदी के भारत में यह समाज और इनके बच्चे खेतों में, ईंट के भट्ठों पर मजदूरी करके अपना भरण-पोषण कर रहे हैं। स्कूल जाना इनके बच्चों के लिए दिवास्वप्न है।
भारत सरकार की आवास योजना और घर-घर शौचालय योजनाएँ इनके लिए बेमानी हैं। कहने के लिए इन्हें संविधान में अनुसूचित जाति का दर्जा मिला हुआ है, पर शिक्षा और स्थायी आवास न होने के कारण डॉ. आंबेडकर का दिया हुआ आरक्षण इनके लिए अर्थहीन है। दुर्भाग्यवश इस समाज की इस दशा के विषय में कभी कुछ नहीं लिखा गया। इस उपेक्षित समाज की स्थिति को देश के सामने लाने के उद्देश्य से यह एक छोटा सा प्रयास है। मुसहर समाज की सामाजिक, आर्थिक तथा शैक्षिक स्थिति पर प्रकाश डालती एक जानकारीपरक कृति।"
लेखक बसंत कुमार का जन्म उ.प्र. के जौनपुर जनपद के पिपरा गाँव में हुआ। औपचारिक शिक्षा-प्राप्ति के पश्चात् रेलवे भरती परीक्षा में सफल हुए और रेलवे की सेवा की। तदुपरांत संघ लोक सेवा आयोग से ‘सिविल सर्विस एलायड परीक्षा’ पास की और विभिन्न मंत्रालयों में अनेक पदों पर काम किया; उपसचिव के पद से स्वेच्छा से सेवानिवृत्त हुए। राष्ट्रवाद व हिंदू संस्कृति से अपनी गहरी आस्था के कारण भाजपा के वरिष्ठ नेता, राष्ट्रवादी चिंतक व विचारक पं. कलराज मिश्र के सान्निध्य में भाजपा से जुड़ गए।
एक लेखक व स्तंभकार के रूप में उन्होंने अनन्य योगदान किया है। पूर्व में पं. अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा संपादित दैनिक ‘वीर अर्जुन’ में इनके नियमित कॉलम प्रकाशित होते रहते हैं, जिनमें ये बड़ी बेबाकी से विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखते हैं। इनके द्वारा संपादित पुस्तकें हैं—‘राष्ट्रवादी कर्मयागी कलराज मिश्र’ (संपादन), ‘हिंदुत्व एक जीवन शैली’ (संकलन), ‘युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद’, ‘एकात्म मानववाद भाजपा का लक्ष्य’ एवं ‘Priorities of India's Economy’.
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