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जिन्होंने हमेशा जीवन में मिले दायित्वों का निर्वहन एक सेवक की भाँति जिन्होंने किया; जिसने बचपन में हिमालय की कंदराओं में तपस्या की; जो इस प्रकार से आसक्ति का वरण करते हैं कि देश की सर्वोच्च सत्ता पर आसीन होने के बाद भी उनके परिजन अपने पुराने दिनों में ही जी रहे हैं; जिसे जय-पराजय कभी विचलित नहीं कर सकती, जिससे परिचय का अर्थ, आपको कुछ भी कर सकने की छूट नहीं; जिसने अपने को कभी लक्ष्य से भटकने नहीं दिया। कश्मीर में धारा 370 को हटानी हो या राम मंदिर निर्माण, अपने हर एक वचन को निभाने वाला, जिसके कठोर-से-कठोर निर्णय पर जनता सहर्ष साथ निभाती है, वही हैं इस प्रेरक कथा के नायक श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी- इस युग के नायक। इसलिए इस पुस्तक का नाम ही रखा है- 'मोदी : एक युग'।