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"मेरा संभल महान्' में हिंदू ललनाओं की जीवित जल-समाधियों में संभल की सृष्टिकालीन पौराणिकता को अत्यंत सूक्ष्म एवं विधिवत् रूप से प्रस्तुत कर श्लाघनीय कार्य किया है, जिसमें उन्होंने अधिकतम उपलब्ध तीर्थ-क्षेत्रों, मंदिरों एवं पवित्र कुंडों के भव्य एवं भव्य चित्रांकन के साथ उनका सृष्टिकालीन प्रस्तुतीकरण एवं महत्ता पर प्रकाश डालते हुए एक ही स्थान पर संकलित कर हिंदू समाज को आलोकित एवं प्रफुल्लित करने का महती कार्य हुआ है।
देश की स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात् राजनीति के अधोपतन एवं मुसलिम तुष्टीकरण के कारण संभल के हिंदुओं को अपने ही देश में जो धार्मिक कट्टरता-धर्मांधता तथा जिहाद की भावना से विद्वेष की मर्मांतक अकल्पनीय पीड़ा को भोगना एवं झेलना पड़ा, उसका भी सटीक और वास्तविक वर्णन एवं प्रस्तुतीकरण कर अदम्य साहस का परिचय दिया है लेखक ने।"