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"हम इस पुस्तक में जिस काल को इंगित करने या जिसकी चर्चा करने जा रहे हैं, उसे इतिहास की पुस्तकों में मुगलों का ही काल कहा गया है। यह वह काल था, जब हमारे झारखंड में कई राजवंश पनप रहे थे। इनमें नागवंश, चेरोवंश और सिंहवंश प्रमुख थे। ये वे राजवंश थे, जिन्होंने मुगलों का दंश झेला था और जमकर उनका सामना भी किया था। इनके प्रतिकार की शक्ति को मुगल कम नहीं कर पाए थे। ऐसे कई अवसर आए, जब झारखंड के वीर राजाओं को हार का सामना करना पड़ा, पर न उन्होंने कभी हार मानी, न हथियार डाले। लगातार संघर्ष करते रहे और हमें अपना सम्मान करने के योग्य बने रहने के लिए अपनी वीरता की कई कहानियाँ धरोहर स्वरूप सौंप गए।
मध्यकालीन झारखंड ने कई युद्धों से साक्षात्कार किया, कई समस्याओं का सामना किया, कई दंश झेले, फिर भी दृढ़ खड़ा रहा। लगभग सभी मध्यकालीन आक्रांता शासकों ने झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों पर आक्रमण किए। आक्रांताओं और मुगलों ने इसे लूटने का भरसक प्रयास किया। इन सभी के विरुद्ध समय-समय पर झारखंड की माटी ने ऐसे वीर पुत्रों को जन्म दिया, जिन्होंने इसकी रक्षा ही नहीं, वरन् अपनी जननी जन्मभूमि का गौरव और मान भी बढ़ाया।
ऐसे ही एक वीर पुत्र मेदिनी राय की कथा इस पुस्तक के माध्यम से आपके समक्ष लाने की एक कोशिश है। मेदिनी राय अर्थात् झारखंड का सम्मान और हम सबकी शान।"